(1) भारत में उच्च न्यायालयों से अपीलें - Page 279

262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नई व्यवस्था में, प्रिवी कौंसिल को अपील करने के सम्बन्ध में प्रिवी कौंसिल की अधिकारिता समाप्त हो सकती है और उच्चतम न्यायालय में निहित हो सकती है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं यह नहीं जानता हूँ कि क्या सरकार ऐसी स्थिति में कोई फैसला ले सकती है जबकि संविधान सभा की बैठक संविधान की परिभाषा करने के प्रयोजन से हो रही है?

श्री एम. अनंतशयनम् अय्यंगर : क्या पूर्व मंत्री भारत सरकार अधिनियम की धारा 299 और अन्य धाराओं के अंतर्गत कुछ मामलों में अपीलों को प्रिवी कौंसिल में जाने से बचाने के लिए कार्यवाही करने के लिए संकल्प पेश करना नहीं चाहते थे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता कि क्या स्थिति रहती है जैसी पहले थी। मैं मानता हूँ कि तत्कालीन विधि मंत्री कार्यवाही प्रस्तावित कर रहे थे जैसाकि मेरे माननीय मित्र ने उल्लेख किया है। लेकिन नया संविधान बनाने के संदर्भ में कुछ भी अनुध्यात नहीं था।

माननीय अध्यक्ष : व्यवस्था रखें। व्यवस्था बनाये रखें। क्या माननीय सदस्य श्री अय्यंगर, सूचना के लिए पूछेंगे? यह बहस का विषय बनता प्रतीत होता है।

श्री एम. अनंतशयनम् अय्यंगर : मैंने सूचना मांगी थी। लेकिन माननीय सदस्य यह जानने को उत्सुक दिखाई नहीं देते कि पहले क्या हुआ है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने कहा मुझे इसकी जानकारी है?

श्री एम. अनंतशयनम् अय्यंगर : क्या माननीय सदस्य का वर्तमान भारत सरकार अधिनियम के अन्तर्गत कार्यवाही करने का विचार है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं यह नहीं समझता हूँ कि इस प्रकार की कार्यवाही की जा सकती है जब हम यह जानते हैं कि कुछ महीनों में नया संविधान तैयार हो जायेगा।

श्री के. संथानम : क्या माननीय सदस्य जानते हैं कि यदि उच्चतम न्यायालय की स्थापना में नई संविधान सभा तक विलंब होता है तो संविधान का लागू होने पर संक्रमण संबंधी कठिनाईयाँ होंगी।

माननीय अध्यक्ष : व्यवस्था बनाये रखें। व्यवस्था बनाये रखें। यह राय का प्रश्न है।

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