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(2)
ल्ांबित अपीलों का निर्णय करने के लिए प्रिवी काँउसिल की
- श्री आर. आर. दिवाकर : (क) क्या माननीय मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि प्रिवी कॉंउसिल की न्यायिक समिति की अधिकारिता उसके समक्ष अब लंबित अपीलों तथा उन अपीलों पर, जो उसके बाद फाइल की जायेंगी, पर कार्यवाही उस समय तक होगी जब तक सिविल प्रक्रिया संहिता जैसे विद्यमान अधिनियमों में कोई परिवर्तन नहीं होता है?
(ख) प्रिवी काँउसिल के सम्बन्ध में डोमिनियन सरकार की भावी नीति क्या होगी?
(ग) क्या सरकार का प्रिवी काँउसिल की अधिकारिता मुक्त उच्चतम न्यायालय की शीघ्र स्थापना के औचित्य पर विचार करने का प्रस्ताव है?
(घ) यदि हाँ, तो इस प्रकार के न्यायालय की स्थापना के सम्बन्ध में अपेक्षित उचित समय क्या है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : (क) हाँ।
(ख) प्रिवी कॉंउसिल की अपीलों के सम्बन्ध में सरकार की भावी नीति सामान्यतया नये संविधान में समाविष्ट संविधान सभा के विनिश्चय के अनुसार होगी।
(ग) नहीं, जब तक नया संविधान लागू नहीं होता है।
(घ) फिलहाल कोई अनुमान देना सम्भव नहीं है।
सेठ गोविंद दास : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि यदि संविधान सभा यह निर्णय लेती है कि कोई भी अपील प्रिवी काँउसिल को नहीं भेजी जानी चाहिए, उन अपीलों का क्या होगा जो उस विनिश्चय से पहले ही प्रिवी काँउसिल को भेजी जा चुकी हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे विश्वास है कि संविधान सभा ऐसे मामलों को शामिल करने के लिए अपना निश्चय करते समय, समुचित उपबंध करेगी।
* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड- 1, भाग- I, 18 नवम्बर, 1947, पृ. 71