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करने का प्रस्ताव
287 श्री एम. अनंतशयनम् अय्यंगर : (क) क्या विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या आयकर अपीलीय अधिकरण का पुनर्गठन या उपांतर करने के लिए कोई प्रस्ताव है और यदि हाँ, तो वे प्रस्ताव क्या हैं?
(ख) क्या सरकार का आयकर अधिनियम के अधीन सभी मामलों में आयकर अपीलीय अधिकरण से प्रान्तीय उच्च न्यायालयों को निर्देशों को समाप्त करने के लिए कानून स्थापित करने तथा उनके स्थान पर सीधे फेडरल न्यायालय को निर्देश भेजने को प्रतिस्थापित करने पर विचार करने का कोई प्रस्ताव है जहाँ निर्देश का प्रावधान है।
(ग) क्या सरकार का आयकर अपीलीय अधिकरण का किसी ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष नियुक्त करके, जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा है, इसका स्तर बढ़ाने पर विचार करने का प्रस्ताव है? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : (क) नहीं।
(ख) भारतीय आयकर अधिनियम के अधीन निर्देशों के लिए फेडरल न्यायालय को आरंभिक न्यायालय बनाने के सुझाव पर फेडरल न्यायालय की अधिकारिता को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव के सम्बन्ध में वर्ष 1945-46 में पूर्णरूप से विचार किया गया था और विधायी विभाग के तारीख 15 जनवरी, 1945 के संकल्प के अनुसरण में सार्वजनिक राय ली गई थी। वह राय सुझाव के अत्यधिक विरुद्ध थी और स्वर्गीय श्री भूलाभाई देसाई ने इसे सिद्धांत रूप से अत्यधिक आपत्तिजनक और निर्धारितियों के लिए अनुपयुक्त बताया था। अब फेडरल न्यायालय नागरिक अपील के लिए उच्चतम न्यायालय है, इसलिए इसे आयकर निर्देशों के लिए आरंभिक न्यायालय
* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड- 1, भाग- I, 14 फरवरी, 1948, पृ. 719