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डॉ. अम्बेडकर : मैंने कहा है, ‘‘शीघ्र’’! मुझे विश्वास है कि इसमें अधिक समय नहीं लगेगा।
श्री रत्नास्वामी : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि जातियों की सूची में शामिल करने के संबंध में सरकार ने यह निर्णय किस आधार पर लिया है?
डॉ. अम्बेडकर : प्रश्न स्पष्ट नहीं है। हमने भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अधीन अनुसूची प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त हमने कुछ अन्य जातियों को शामिल किये जाने के सम्बन्ध में प्रांतीय सरकारों की राय जानने के लिए उनसे कुछ प्रश्न पूछे हैं। जैसे ही उनकी राय प्राप्त हो जाएगी, सूचियाँ जारी कर दी जायेंगी।
डॉ. एम. एम. दास : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि आगामी जनगणना में अनुसूचित जातियों को अनुसूचित जातियाँ माना जायेगा।
डॉ. अम्बेडकर : मैं ऐसा मानता हूँ।
सरदार बी. एस. मान : मैं यह जानना चाहता हूँं कि क्या संकलित की जाने वाली प्रस्तावित सूचियाँ देश के सभी राज्यों के लिए समान रूप से लागू होंगी अथवा क्या वे प्रत्येक राज्य के लिए अलग-अलग होंगी।
डॉ. अम्बेडकर : ऐसा नहीं हो सकता है। ये हमेशा प्रांतीय सूची होंगी।
श्री बूरागोहैन : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि क्या अनुसूचित जनजातियों की सूची की भी जांच हो रही है। डॉ. अम्बेडकर : ओह, हाँ।
श्री त्यागी : क्या सरकार का आशय उन जातियों को सूची में शामिल नहीं किये जाने का है जिन्होंने तथाकथित हिन्दू जातियों के बराबर प्रगति कर ली है।
डॉ. अम्बेडकर : अनुसूचित जातियाँ हमेशा अछूत रही हैं। कुछ भी कम नहीं।
श्री त्यागी : क्या सरकार का आशय सूचियों में परिवर्तन करने का है ताकि उन जातियों को निकाला जा सके जिनके साथ, उनके प्रगति करने के बाद छूआछूत नहीं की जाती है?
डॉ. अम्बेडकर : अनुसूचियों को बदले जाने की प्रक्रिया संविधान में उपलब्ध है। यह संसदीय विधान द्वारा किया जा सकता है।
श्री नायक : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 340 को लागू करने के लिए कोई कदम उठाये हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आयोग की नियुक्ति एक अलग मामला है।
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वह भी विचाराधीन है।