278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्रीमती दुर्गाबाई : चूंकि अस्पृश्यता पर संविधान द्वारा रोक लगा दी गई है, क्या यह अब भी निकालने या शामिल करने का आधार बन सकती हैं?
श्री बर्मन : क्या अंतिम सूची के प्रकाशित किये जाने से पहले अंतरित सूची प्रकाशित करने का विचार है?
डॉ. अम्बेडकर : यह अनुध्यात नहीं है, क्योंकि सूची जारी करने की शक्ति राष्ट्रपति को दी गयी है।
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* निर्वाचक नामावली
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निर्वाचक नामावली
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) संविधान के अंतर्गत होने वाले आम चुनावों पर आने वाले कुल व्यय के बारे में बताना बहुत अधिक जल्द बाजी होगी। अब तक प्राप्त हुई सूचना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भाग ‘क’ और भाग ‘ख’ के राज्यों को केन्द्र वर्ष 1949-50 के दौरान 1.86 करोड़ रुपये तथा वर्ष 1950-51 के दौरान 1.34 करोड़ रुपए देगा और इस धनराशि का अधिकांश भाग निर्वाचक नामावलियों को प्रकाशित करने और उन्हें तैयार करने पर व्यय किया जाएगा।
(ख) निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने और उन्हें प्रकाशित करने में राज्य सरकारों द्वारा खर्च की गई अतिरिक्त राशि को केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा आधा-आधा वहन किया जाएगा। केवल लोकसभा चुनाव होने की स्थिति में राज्य सरकारों द्वारा व्यय की गई अतिरिक्त लागत को पूर्ण रूप से केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा किन्तु यदि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ हो रहे हों तो इस अतिरिक्त लागत को केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा आधा-आधा वहन किया जाएगा। यहाँ पर ‘‘अतिरिक्त लागत’’ का अर्थ उस खर्च से है जिसे राज्य सरकार निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने, उन्हें प्रकाशित करवाने अथवा चुनाव प्रक्रिया में
खर्च करती है जिसमें वर्तमान राज्य सरकार के किसी भी अंग का कोई व्यय शामिल नहीं है। दूसरे शब्दों में, अतिरिक्त लागत को निकालते समय इसमें राज्य सरकारों के वर्तमान अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन को शामिल नहीं किया जाएगा।
श्री नन्दकिशोर दास : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या निर्वाचक नामावलियों के प्रकाशन का कार्य पूरा हो गया है?
* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड- 4, भाग- I, 21 मार्च, 1950, पृ. 964