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डॉ. अम्बेडकर : निश्चित रूप से यह निर्वाचन आयुक्त का कार्य होगा। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं इस सत्र में ‘‘लोक प्रतिनिधित्व विधेयक’’ नाम का एक विधेयक ला रहा हूँ जिसमें निर्वाचन आयुक्त में निहित शक्तियों और उनके प्रयोग का उपबंध होगा ताकि वे इस मामले में सही कार्य कर सकें।
श्री ए. पी. जैन : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि सरकार के विचाराधीन वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार निर्वाचक नामावलियाँ पूरी हो जाने के पश्चात् अंतिम रूप से चुनाव होने में कितना समय लगेगा?
डॉ. अम्बेडकर : मैं कोई अटकल लगाना नहीं चाहता।
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(12)
1106 लाला राजकंवर : क्या विधि मंत्री निम्नलिखित जानकारी युक्त विवरण सभापटल पर रखने की कृपा करेंगे :
(क) देश में आयकर अपीलीय अधिकरणों की संख्या कितनी है। इनमें प्रत्येक में कितने-कितने कर्मचारी हैं?
(ख) गत तीन वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष इन अधिकरणों द्वारा कितने मामले शुरू किए गए और कितने मामले निपटाए गए?
(ग) प्रत्येक अधिकरण में इस समय कितने-कितने मामले लम्बित पड़े हैं?
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : एक विवरण सभापटल पर रखा है। (कृपया परिशिष्ट V, उपबंध नं. 55 देखें)। (यहाँ पर नहीं दिया गया है)
लाला राजकंवर : लम्बित मामलों को तेजी से निपटाए जाने के लिए सरकार का क्या कदम उठाने का प्रस्ताव है।
डॉ. अम्बेडकर : मेरा विचार है कि मामलों के निपटारे का कार्य संतोषजनक है। यदि वह संतोषजनक नहीं है तो सरकार और अधिकरणों की स्थापना करेगी।
श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : मैं जानना चाहता हूँ कि अधिकरण के सदस्यों को दिए जाने वाले वेतन को हाल में कम किया है अथवा पुनः श्रेणीकरण किया गया है?
श्रीमती दुर्गाबाई : मैं जानना चाहती हूँ कि इन अधिकरणों में नियुक्तियाँ कैसे की जाती हैं?
डॉ. अम्बेडकर : ये नियुक्तियाँ लोक सेवा आयोग द्वारा की जाती हैं।
* संसदीय सभा (विधायी) वाद-विवाद, खंड- 4, भाग- I, 24 नवम्बर, 1947, पृ. 1059