35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 30

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परिणामस्वरूप, संसद के सदस्यों को अनुच्छेद 192 के उपबंधों का विस्तार करते हुए बहुत उत्साही रहना चाहिए ताकि बाहर जनता एक प्रकार के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के लिए उनकी आलोचना न करे- आशा है, सदस्य मुझे क्षमा करेंगे। हमें इसे उसी दृष्टिकोण से देखना होगा। यह बिल्कुल सच है कि जब किसी सदस्य को समिति में नियुक्त किया जाता है तो वह देश की कतिपय सेवा कर रहा है।

मननीय सदस्य : क्या भ्रष्टाचार है?

डॉ. अम्बेडकर : इसके बारे में सभी पहलू हैं। सदस्य के दृष्टिकोण से, निस्संदेह यह सेवा है, जो वह करता है। विपक्ष की दृष्टि से, यदि ऐसा है- इसका एक और पहलू हो सकता है। विपक्ष बहुत ही विधि सम्मत रूप से यह दलील दे सकता है कि सरकार लाभ के पद के नियम का विस्तार कर रही है ताकि उसको समर्थन देने के लिए अधिक लोग इकट्ठे हो सकें जब उसको समर्थन चाहिए। इसलिए, जैसा कि मैंने कहा, जबकि अनुच्छेद 102 में अंतर्विष्ट उपबंध में कठिनाइयाँ हैं और उनका समाधान किया जाना चाहिए ताकि समिति के सदस्यों की सलाह लेने में सरकार के रास्ते में कोई गंभीर बाधा न आए, जब कभी संसद के सदस्य ऐसी समितियों में नियुक्त किए जाएँ और इस दृष्टि से भी कि संसद-सदस्य समितियों के माध्यम से सरकार की सेवा करने से वर्जित न हों। ऐसा करते समय हमें यह देखने के लिए सावधान रहना चाहिए कि उपबंध मंदिर न बन जाए जिसके दरवाजे बहुत चौड़े हों और जहाँ पर कोई भी प्रवेश कर सकता हो। सदन के हित में, मैं सोचता हूँ मुझे यह चेतावनी बता देनी चाहिए।

मेरे विचार में इस बारे में कुछ गलतफहमी है कि उसके अध्यधीन रहते हुए विधेयक क्या करता है और विधेयक का आधार क्या है। मुझे बहुत खेद के साथ यह कहना है कि मैंने अपना पक्षकथन स्पष्ट रूप से पेश नहीं किया, क्योंकि संसद-सदस्यों ने मेरा अनुसरण नहीं किया या मुझे नहीं समझा। यह अवश्य ही मेरा दोष रहा कि मैं इतना स्पष्ट नहीं था जितना मुझे नहीं होना चाहिए। अतः मैं एक बार फिर से स्थिति स्पष्ट करना चाहूँगा। लाभ के पद के बारे में हमें यह अवधारित करना है कि लाभ का पद क्या है और लाभ का पद क्या नहीं है। जैसा कि मैंने सदन को पहलू ही बता दिया था, सरकार लाभ के पद का कोरा तकनीकी दृष्टिकोण लेना प्रस्तावित नहीं करती जैसा वे इंग्लैंड में करते हैं, जहाँ पर विधि में उल्लेख है कि अमुक पद लाभ का पद है और क्या कोई लाभ का पद है या नहीं अथवा क्या कोई विशिष्ट व्यक्ति जो उस लाभ के पद को धारण करता है, कोई धन प्राप्त करता है अथवा नहीं, विधि के प्रयोजन के लिए ही यह है कि लाभ का पद धारण करने वाला निरर्हित है। सरकार का आशय इस नियम को संविधान में न लाना और संसद