284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : मुझे अफसोस है कि मुझे उनके नाम याद नहीं हैं लेकिन मेरा इरादा निश्चित रूप से उन महिला संगठनों को आमंत्रित करने का है जिनके पास हमारी सूचना पहुंच चुकी है परन्तु वे इस कोड के ज्यादा पक्ष में नहीं है।
श्रीमती अम्मू स्वामीनाथन : क्या आप मुझे यह बताएंगे कि यह सम्मेलन कब
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होने जा रहा है?
डॉ. अम्बेडकर : आशा करता हूँ कि इस मास की 14 तारीख को होने जा रहा है।
श्री देशबंधु गुप्ता : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या सदन के उन सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है जो इस कोड का विरोध करते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : सम्मेलन को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसमें प्रवर समिति के सदस्य होंगे और सदन का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य होंगे तथा अन्य सदस्य भी होंगे जो न तो सदन के सदस्य होंगे और न ही समिति के, बल्कि वे बाहर के होंगे।
श्री बी. दास : मैं जानना चाहूँगा कि क्या माननीय विधि मंत्री महोदय सरकार को हिंदू कोड बिल पास करने के लिए इस सदन का विशेष सत्र बुलाने की सलाह देंगे?
डॉ. अम्बेडकर : इस बात का पहले से पूर्वानुमान लगाने की आवश्यकता नहीं है.
माननीय अध्यक्ष : कृपया शान्त हो जाइए। मैं इस प्रश्न को उठाने की अनुमति नहीं दे सकता।
श्री देशबंधु गुप्ता : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या माननीय मंत्री महोदय को समाज के विभिन्न वर्गों से इस आशय के सुझाव प्राप्त हुए हैं कि कुंभ के मेले को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन की तारीख कुछ दिन के लिए आगे बढ़ायी जाए ताकि कुंभ से लौट कर आने वाले इस सम्मेलन में भाग ले सकें?
डॉ. अम्बेडकर : मुझे इस आशय का कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है परन्तु मैंने समाचार-पत्रों में कुछ वक्तव्य जरूर देखें हैं।
श्री एम. ए. अय्यंगर : मैं माननीय मंत्री से पूछना चाहूँगा कि उन्होंने प्रवर समिति से सदस्यों का चुनाव करने के लिए क्या सिद्धांत अपनाया है? क्या उन्होंने इस कोड के विरोध में कुछ भी बोलने वाले लोगों से परहेज किया है?
डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि मेरे दिमाग में किसी भी तरह का कोई पक्षपात है।