(16) हिंदू धर्मार्थ तथा धार्मिक न्यासों द्वारा आय का गबन, आम चुनाव - Page 304

287

डॉ. अम्बेडकर : इस मामले को निर्वाचन आयुक्त द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार निपटा लिया जाएगा।

सरदार बी. एस. मान : क्या मैं यह जान सकता हूँ कि निर्वाचन-क्षेत्रों के

e ku

परिसीमन के मामले में शीघ्र ही की जाने वाली 1951 की जनगणना का उपयोग किया जाएगा अथवा इस समय उपलब्ध वर्ष 1941 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में, संविधान में यह उपबंध किया गया है कि अनंतिम संसद के अस्त्तिव में आने के तीन वर्ष के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। जहाँ तक जनगणना का सवाल है, पुरानी जनगणना को भी आधार बनाया जा सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि राष्ट्रपति द्वारा मतदाताओं की संख्या के आधार पर पंजाब तथा पश्चिम बंगाल जैसे कतिपय प्रांतों की जनसंख्या का आंकलन करा लिया जाए।

श्री केशव राव : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या अल्प-संख्यक समुदायों की ओर से अपने लिए बहु-सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्रों के विषय से संबंधी कोई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं?

डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता हूँ कि निर्वाचन आयोग को क्या शिकायतें प्राप्त हुई हैं, परन्तु मैं यह कह सकता हूँ कि इस संबंध में मुझे अनेक अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।

डॉ. देशमुख : क्या आप बताएंगे कि राष्ट्रपति के पहले वाले आदेश के अधीन जिन जातियों की आपत्तियों का लोप कर दिया गया था, क्या सरकार उनकी आपत्तियों पर विचार करने जा रही है?

डॉ. अम्बेडकर : इस बात पर इस समय विचार नहीं किया जा सकता। संविधान में यह उपबंध है कि जब कभी राष्ट्रपति विभिन्न जातियों और जनजातियों के संबंध में कोई आदेश देता है तो उसमें सरकार की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जाती है और मामले को संसद की कार्यवाही के लिए छोड़ दिया जाता है।

श्री त्यागी : माननीय मंत्री का अंतिम रूप से तैयार लोक प्रतिनिधित्व विधेयक को और मतदान नियमों को इस सदन में कब पेश करना प्रस्तावित करते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : विधेयक को मैं निश्चित रूप से इसी सत्र के दौरान सदन के समक्ष रखने जा रहा हूँ किन्तु मैं यह नहीं समझ पाया हूँ कि मेरे माननीय मित्र का ‘नियमों’ से क्या अभिप्राय है।

श्री त्यागी : नियमों से मेरा मतलब चुनावों के नियमों से है।