288 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : मुझे यह मालूम नहीं है कि हम जब तब इस अधिनियम को पारित नहीं कर देते हैं तब तक चुनाव संबंधी नियम बनाएंगे अथवा नहीं।
श्री आर. के. चौधरी : महोदय, क्या यह तथ्य है कि माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा अवधारित की गई जनसंख्या पर अनेक गंभीर आपत्तियाँ इस आधार पर की गई हैं कि अवधारित जनसंख्या कुछ दृष्टांतों में 1941 की जनगणना की तुलना में कम आई है और चूंकि इसका अवधारण जो मतदाता सूची में वर्णित मतदाताओं की संख्या के आधार पर किया गया है, दोष युक्त पाई गई हैं इसलिए क्या अवधारित जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के पुनरीक्षण की संभावना है?
डॉ. अम्बेडकर : यह प्रश्न माननीय गृहमंत्री जी से पूछा जाना चाहिए।
श्री चंद्रिका राम : क्या मैं अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने वाले राज्यों की संख्या जान सकता हूँ?
डॉ. अम्बेडकर : मैं ऐसा नहीं समझता कि अनुसूचित जातियों के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य ऐसा है कि जिसका परिसीमन आम निर्वाचन के परिसीमन से अलग करने की आवश्यकता है।
श्री कॉमथ : इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आम चुनावों की तिथि अप्रैल-मई से आगे बढ़ाकर नवम्बर-दिसम्बर, 1951 कर दी गई है, क्या मतदाताओं की अर्हता तारीखें और अर्हता अवधि में कोई परिवर्तन किया जाएगा?
डॉ. अम्बेडकर : जब तक पहले से पारित अधिनियम में संशोधन नहीं हो जाता है, हम कोई परिवर्तन नहीं कर सकते।
माननीय अध्यक्ष : मेरा ख़्याल है कि हमें अगला प्रश्न लेना चाहिए।
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* आम चुनाव
आम चुनाव
134 श्री देशबंधु गुप्ता : (क) क्या विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सरकार ने अगले आम चुनावों के लिए महीने के अंतिम रूप से नियत कर लिया है और यदि हाँं, तो वह कौन-सा महीना है?
(ख) क्या संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही कराए जाएंगे? * संसदीय वाद-विवाद, खंड- 6, भाग- II, 20 नवम्बर, 1950, पृ. 138