(17) आम चुनाव - Page 306

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(ग) इस विषय पर प्रत्येक राज्य द्वारा व्यक्त किए गए विचार क्या हैं?

(घ) लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग कुल कितने मतदाता नामांकित हैं और निर्वाचक नामावलियों को अंतिम रूप से कब प्रकाशित किया जाएगा?

(ड.) इस चुनावों पर कितना व्यय होने का अनुमान है;

(च) इस कार्य के लिए कितने अधिकारियों को कितने समय के लिए लगाया जाएगा?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) प्रश्न के इस भाग पर दिनांक 14 नवम्बर,

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1950 को राष्ट्रपति के सत्रारंभ के अवसर पर दिए गए अभिभाषण में विचार कर लिया गया है।

(ख) किसी राज्य के संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों में लोकसभा और उस राज्य के विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों, यदि कोई हों, में साथ-साथ चुनाव कराए जाने का विचार है, लगभग उसी समय राज्य विधान परिषदों के चुनाव भी कराए जाएंगे लेकिन साथ-साथ नहीं;

(ग) सभी राज्य इस पक्ष में हैं कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ ही कराए जाएं;

(घ) लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के लिए वही मतदाता हैं। जहाँ तक मतदाताओं की गिनती का सवाल है, लोकसभा के लिए मतदाताओं की कुल संख्या दर्शाने वाला एक विवरण सदन के पटल पर रखा है (देखिए परिशिष्ट I उपाबंध संख्या 29)

अनुपूरक मतदाताओं के आंकड़े अभी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, भोपाल, बिलासपुर, कुर्ग और हिमाचल प्रदेश से आने हैं। भाग क और भाग ख (जम्मू और कश्मीर) के अलावा के राज्यों में राज्यसभा के लिए आवंटित सीटों के लिए मतदाताओं की संख्या 30,55 है। भाग ‘ग’ के लिए राज्यसभा के लिए आवंटित सीटों को भरने के लिए चुनाव की पद्धति संसद द्वारा तय की जाएगी और इस प्रयोजन के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में संशोधन करने के लिए चालू सत्र के दौरान एक विधेयक पेश करने का विचार है। भाग ‘क’ के राज्यों तथा मैसूर में विधान परिषदों के लिए निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने का कार्य चल रहा है और उन मतदाताओं के बारे में कोई भी विचार प्रस्तुत करना असंभव नहीं है। जैसे ही निर्वाचन -क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य तथा अनंतिम निर्वाचक नामावलियों संबंधी दावों तथा एतराजों का समाधान हो जाएगा वैसे ही नामावलियों को यथाशीघ्र अनंतिम