(19) मुस्लिम वैयक्तिक कानून - Page 311

294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को स्पष्ट स्वीकष्ति नहीं दी है।

डॉ. अम्बेडकर : जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ जिन्होंने इस योजना में स्पष्ट रूप से भाग नहीं लिया है उनका कहना है कि वे इसमें शामिल नहीं होना चाहते अथवा उन्होंने अपना निर्णय देने से मना कर दिया इस समय मैं कुछ कह पाने में असमर्थ हूँ।

श्री राजबहादुर : जहाँ तक वित्त का संबंध है अब तक हो चुके व्यय की तुलना में आगे होने वाला व्यय कितना है?

डॉ. अम्बेडकर : तुलना करने का कोई आधार ही नहीं है क्योंकि इससे पूर्व ऐसी कोई एजेन्सी ही नहीं थी।

श्री राजबहादुर : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या स्थानीय सालिसिटरों और एजेन्टों की राय ली गई थी अथवा नहीं?

डॉ. अम्बेडकर : इसकी कोई जरूरत नहीं है। हमने सरकारों की राय जान ली है।

*****

Col1 Col2 Col3 Col4
(19)

561 डॉ. एम. एम. दास : (क) क्या विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि भारतीय संघ में राज्य कौन से हैं जहाँ मुस्लिम पर्सनल लॉज वैयक्तिक कानूनों (शरीयत) एप्लीकेशन ऐक्ट, 1937 प्रवृत्त नहीं है;

(ख) क्या यह सच है कि भारतीय संघ के मुसलमान शरीयत नामक वैयक्तिक कानूनों द्वारा शासित होते हैं; और

(ग) क्या सरकार को कूच बिहार के मुसलमानों की ओर से कोई अभ्यावेदन मिला था जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के समक्ष यह विचार व्यक्त किया गया था कि उनकी वर्तमान वैयक्तिक कानूनों के स्थान पर शरीयत को लाया जाये?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) और (ख)। मुस्लिम पर्सनल लॉज (शरीयत) एप्लीकेशन ऐक्ट 1937 भाग (ख) के राज्यों तथा पश्चिम बंगाल में विलय हो गए कूच बिहार के इलाके में लागू नहीं है। यह शेष भारत में प्रवृत्त हैं। जहाँ तक कूच

* संसदीय वाद-विवाद, खंड- 6, भाग- I, 1 दिसम्बर, 1950, पृ. 536