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बिहार का संबंध है, कूच बिहार (एसिमिलेशन ऑफ लॉज) बिल जो संसद के समक्ष लंबित पड़ा है, खण्ड 3 में 1937 के अधिनियम को उस क्षेत्र में लागू करने के बारे में उपबंध किया गया है भाग ‘ख’ के राज्यों की स्थिति यह है कि वहाँ मुसलमान मुख्यतः शरीयत द्वारा शासित हैं लेकिन यह स्थापित रूढि़ या प्रथा या स्थानीय विधियों द्वारा समाविष्ट परिवर्तनों के अध्यधीन है।
(ग) जहाँ तक मुझे ज्ञात है, पश्चिम बंगाल सरकार ने कूच बिहार में मुसलमानों को लागू होने वाले पर्सनल (स्वीय) विधि से भिन्न कानून लाने के लिए कुछ नहीं किया है। जैसे ही इस सदन द्वारा कूच बिहार (एप्लीकेशन ऑफ लॉज) बिल पारित होगा और यह प्रवृत्त होगा, वह सरकार उचित समय के भीतर पर्याप्त विचार करके विधेयक के खण्ड 3(2) के अधीन कूच बिहार में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन ऐक्ट, 1937 को लागू कर देगी।
डॉ. एन. एम. दास : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या माननीय विधि मंत्री पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले परिवर्तनों के बारे में कूच बिहार के मुसलमानों के विचारों को जानना आवश्यक और उचित समझते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : यह मामला पश्चिम बंगाल सरकार के जिम्मे छोड़ दिया गया है।
श्री श्यामनन्दन सहाय : क्या संसद के समक्ष मुस्लिम संहिता भी लाने के लिए सरकार के विचारार्थ कोई प्रस्ताव लंबित है? डॉ. अम्बेडकर : जी नहीं।
श्री त्यागी : क्या सरकार का इरादा मुसलमानों में व्याप्त मुस्लिम कानूनों को विनियमित करने के लिए कोई कानून बनाने का है?
डॉ. अम्बेडकर : यह प्रश्न पहले उठाया गया था और इसका उत्तर भी दिया जा चुका है।
श्री त्यागी : मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या सरकार का इरादा मुस्लिम कानून में सुधार करने का है?
माननीय अध्यक्ष : कोई मुस्लिम संहिता लाने का इरादा नहीं है। यही बात मंत्री महोदय बता चुके हैं और उनके उत्तर में सभी मुद्दे आ गए हैं।
श्री ए. सी. गुहा : क्या सरकार संविधान के अनुसार सभी समुदायों के लिए कोई एक समान सिविल संहिता लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है?
डॉ. अम्बेडकर : यह मुद्दा मेरे भी दिल में है लेकिन मेरे पास समय ही नहीं है।