296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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709 श्री काज़मी : क्या विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः
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(क) भारतीय संघ के विरुद्ध मामलों की न्यायालय कार्यवाहियों में विधि व्यावसायियों की नियुक्तियों के लिए क्या प्रक्रिया है;
(ख) क्या उन्हें पारिश्रमिक दिया जाएगा? और
(ग) क्या इन नियुक्तियों के समय भारत के अटार्नी जनरल; एडवोकेट, जनरल ऑफ स्टेट अथवा स्थानीय सरकारी वकील से परामर्श किया गया है और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) भाग ‘क’ के सभी राज्यों में केन्द्रीय सरकार संबंधी कानूनी कार्य सामान्यतः करार से आपसी राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है तथा यह कार्य राज्य के विधि परामर्शी तथा उसके नियंत्रणाधीन विधि अधिकारियों द्वारा किया जाता है जैसे जिला सरकारी वकील। बंबई तथा कलकत्ता के प्रेसीडेन्सी नगरों में इस कार्य को करने के लिए हमारे अपने सालीसिटर हैं। रेलवे और आयकर विभाग जैसे कुछ विभागों ने भी न्यायालयों में अपने मामलों के लिए अपनी-अपनी व्यवस्था की हुई है। केन्द्र सरकार ने भाग ‘क’ के सभी राज्यों में जिला वकील नियुक्त कर रखे हैं ताकि वे रेलवे से संबंधित मामलों के अलावा केन्द्र सरकार द्वारा अथवा केन्द्र सरकार के विरुद्ध दाखिल मुकदमों की कार्यवाही को सरकारी वकील के रूप में चलाएं। भाग ‘ख’ के राज्यों के लिए अभी कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं की गई है। भाग ‘ख’ राज्यों में आवश्यक व्यवस्था करने के लिए मुख्य आयुक्तों को प्राधिकृत किया गया है।
(ख) सिवाय वहाँ के जहाँ विशेष दरों पर सहमति हो गई है, राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किए गए सरकारी वकील राज्य सरकार के मामलों की पैरवी के लिए जिस दर से शुल्क लेते हैं, उसी दर पर वे केन्द्रीय सरकार के मामलों की भी पैरवी करते हैं।
(ग) जैसा कि प्रश्न के भाग ‘क’ के उत्तर में बताया गया है, एक साधारण नियम के तौर पर, जिला सरकारी वकील भाग राज्यों में भारत सरकार के विरुद्ध मामलों
* संसदीय वाद-विवाद, खंड- 6, भाग- I, 6 दिसम्बर, 1950, पृ. 694