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अभ्यावेदन चुनावों को नवम्बर, 1951 तक के लिए स्थगित करने के विरुद्ध है।
प्रो. एस. एन. मिश्र : क्या मैं जान सकता हूँ कि चुनावों को नवम्बर-दिसम्बर, 1951 तक स्थगित करने के मुख्य कारण क्या हैं?
श्री द्विवेदी : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या सरकार चुनावों के दौरान पार्टी और धार्मिक ध्वजों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है?
डॉ. अम्बेडकर : मैं समझता हूँॅ कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए, जो भी आवश्यक होगा वह सब किया जाएगा।
श्री जोशिम अल्वा : क्या सरकार प्रचार तंत्र की ऐसी कोई व्यवस्था अपनाने जा रही है जिससे चुनाव उचित ढंग से हों और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचा जा सकें?
डॉ. अम्बेडकर : मेरा विचार है कि इस बात को राजनीतिक दलों के जिम्मे छोड़ देना ही बेहतर होगा।
श्री जयनारायन व्यास : क्या सरकार चुनाव व्यय करने के लिए विभिन्न राज्यों पर लेवी लगाएगी?
डॉ. अम्बेडकर : जी हाँ। विभिन्न राज्यों तथा केन्द्र के बीच पहले ही यह करार हो गया है कि चुनावों पर आए व्यय को अनुपातिक रूप से वहन किया जाएगा।
डॉ. एम. एम. दास : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या किसी राज्य सरकार ने कोई प्रतिनिधि मण्डल भेजा है और यदि हाँ, तो इसका क्या परिणाम निकला?
डॉ. अम्बेडकर : किस बात का प्रतिनिधि मण्डल?
डॉ. एम. एम. दास : चुनावों की तिथि को बढ़ाने के लिए।
डॉ. अम्बेडकर : नहीं। मुझे तो याद नहीं पड़ता कि कोई प्रतिनिधि मण्डल भेजा गया था।
श्री आर. वेलायुधन : वह कौन सा अकेला राज्य है जिसने चुनावों की तिथि को आगे बढ़ा देने का विरोध किया है?
डॉ. अम्बेडकर : मैंने यह नहीं कहा था कि अभ्यावेदन राज्यों से प्राप्त हुए हैं। वे अभ्यावेदन अलग-अलग व्यक्तियों के हो सकते हैं और यह जरूरी नहीं है कि वे राज्यों के हों। चुनाव तिथि को आगे बढ़ाए जाने का विरोध करने संबंधी अभ्यावेदन को भेजने वाले उस प्रतिनिधि विशेष का नाम मुझे मालूम नहीं है।
श्री बी. के. पी. सिन्हा : क्या यह सच है कि कुछ पार्टियाँ यह जानकर परेशान