(24) दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली - Page 317

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हो गई थी कि चुनावों के लिए इस बात का संकल्प पारित किया जा रहा है कि सरकार ने चुनावों की तिथि को आगे बढ़ाकर बहुत भारी नुकसान किया है?

डॉ. अम्बेडकर : मैं समझता हूँ कि मेरे माननीय मित्र मुझसे ज्यादा जानते हैं।

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* अल्पावधि सूचना : प्रश्न और उत्तर
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दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों की निर्वाचन नामावलियाँ

श्री जे. आर. काम्बले : क्या सरकार का ध्यान दिनांक 20 मार्च, 1951 के ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ के ‘इवनिंग न्यूज’ और 21 मार्च, 1951 के ‘इंडियन न्यूज क्रॉनिकल’ में प्रकाशित इस समाचार की ओर दिलाया गया है कि दिल्ली के निर्वाचन आयुक्त ने आदेश दिया है कि आगामी आम चुनावों के लिए दिल्ली राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्वाचक नामावलियों को केवल उर्दू में प्रकाशित किया जाएगा;

(ख) क्या इस समाचार में प्रकाशित तथ्यों में सच्चाई है और यदि हाँ तो इन निर्वाचक नामावलियों को संघ की राजभाषा हिन्दी में प्रकाशित न किए जाने के क्या कारण है; और

(ग) भाग ‘ग’ के राज्यों में अगले आम चुनावों के लिए निर्वाचन नामावलियों की भाषा के संबंध में सरकार की क्या नीति है?

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) और (ख) प्रश्न में जिन दो समाचारों का उल्लेख किया गया है, उनका संबंध दिल्ली जिला बोर्ड के चुनावों से है और उनका संसद के आम चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। जहाँ तक लोक सभा के लिए होने वाले आम चुनावों के संबंध में दिल्ली की निर्वाचक नामावलियों का संबंध है, इन्हें अंग्रेजी, हिन्दी और उर्दू तीन भाषाओं में प्रकाशित किया जाएगा।

(ग) किसी राज्य की निर्वाचक नामावलियों को किस भाषा में तैयार किया जाए, इस संबंध में निर्णय लोक प्रतिनिधित्व (निर्वाचक नामावली का तैयार किया जाना) नियम, 1950 के नियम 6 के अधीन निर्वाचन आयोग द्वारा लिया जाएगा।

सामान्यतः निर्वाचन नामावलियों को पूरे देश में केवल क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किया जाता है लेकिन कुछेक राज्यों के द्विभाषी क्षेत्रों में चुनाव आयोग का निर्देश है

* संसदीय वाद-विवाद, खंड- 7, भाग- I, 2 अप्रैल, 1950, पृ. 2788