15
सरकार ने स्वीकार किया है- न केवल वित्त मंत्रालय द्वारा विनिश्चित है, बल्कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकार द्वारा स्वीकार किया गया था।
जैसा कि मैंने कहा, मामला अध्यक्ष और राष्ट्रपति के माध्यम से सरकार के सामने लाया गया था। केवल एक या दो मामले थे जो सरकार के विचारार्थ निर्दिष्ट किए गए थे किंतु सरकार ने यह महसूस किया कि यह पता लगाना वांछनीय है कि इस प्रकार के कई और मामले हैं जिनकी ओर अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित नहीं किया गया था और इसीलिए हमने विभिन्न मंत्रालयों में परिपत्र भेजे। हमने विभिन्न विभागों को यह जानने के लिए परिपत्र भेजे कि क्या ऐसे कोई अन्य मामले हैं, जिन पर विचार किया जाना अपेक्षित है ताकि एक वृहत प्रस्ताव लाया जा सके जिसके अंतर्गत ऐसे सभी मामले आ जाएं जो संविधान के प्रारंभ से प्रकट हुए थे। मामले प्राप्त होने के पश्चात् हमने यह कसौटी लागू की जिसके बारे में मैंने अभी उल्लेख किया है- प्रति कर की राशि क्या थी, जो दी गई थी। क्या यह मात्र खर्चे थे या उससे कुछ अधिक थी। यदि वह उससे कुछ अधिक थी, तब हमने विनिश्चित किया कि इसे लाभ का पद समझा जाना चाहिए। यदि राशि थी तब हमने यह माना कि यह लाभ का पद नहीं है, यह इस प्रश्न के बावजूद था कि क्या इसका धारक संसद-सदस्य है या नहीं। हम बहुत सावधान थे मैं पुनः दोहराता हूँ, हमारे विनिश्चिय के लिए सही आधार का पता लगाने के लिए हम सावधान थे, क्योंकि यदि तदर्थ प्रत्येक मामले को, उसी के आधार पर देखते तो यह कहा जा सकता था, कि हमने इस विशेष मामले पर एक कसौटी लागू की और दूसरे मामले में दूसरी कसौटी। हम सरकार के विरूद्ध उस प्रकार का अभियोग लगाना नहीं चाहते थे और इसीलिए हम एक व्यापक मूल सिद्धांत खोजने के बहुत इच्छुक थे जो सभी मामलों में लागू किया जाए। इसी आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि ऐसे कुछ मामले थे जो इस सिद्धांत से भी आगे थे अर्थात् भत्ते उनसे परे थे जिसे उपगत वास्तविक खर्चों के लिए प्रतिकर मात्र कहा जा सकता है।
पंडित कुंजरू : किंतु अन्य समितियाँ भी थीं।
डॉ. अम्बेडकर : मैं उन पर भी आ रहा हूँ। उठाए गए प्रश्न अर्थात् पुनर्वास वित्त
| vEcsM | dj |
|---|
निगम की बाबत अब यह स्पष्ट है कि यह अनुच्छेद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद की बाबत है। किसी निगम के अधीन लाभ का पद, लाभ का पद हो सकता है। निश्चित रूप से वह सरकार के अधीन लाभ का पद नहीं है और इसीलिए वह व्यक्ति निरर्हित नहीं है।
श्री सिधवा : यह भारत सरकार के अधीन है।
डॉ. अम्बेडकर : मैं जो कह रहा हूँ वह न्यायिक निर्वचन है और मुझे विश्वस है,
| vEcsM | dj |
|---|