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नफ़रत की निगाह से देखने लगेगी। ऐसी स्थिति बिल्कुल पैदा नहीं होनी चाहिए।
महोदय, सरकार के द्वारा इस इमदाद के बारे में अचानक निर्णय किए जाने के कारण स्थिति अत्यधिक खराब हो गयी है। एक तरीके से इमदाद एक अतिरिक्त परियोजना है जो सरकार ने ऊंची जीवन निर्वाह लागत के कारण आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए आरंभ की है। जहाँ तक हमारी जानकारी है, इमदाद प्रवर्तन में है.....
श्री बी. बी. शर्मा (उत्तर प्रदेश) : माननीय सदस्य कितने प्रतिशत लोगों को
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खाद्यान्न के मामले में इमदाद दिलाना चाहते हैं?
डॉ. अम्बेडकर : महोदय, मेरा निवेदन यह है कि मुझ से यह आशा न करें कि मैं संपूर्ण राशन प्रणाली की ब्यौरेवार बात करूं। मैं इसके विस्तार में नहीं जाना चाहता कि वे जनसंख्या का किस प्रकार वर्गीकरण करें जिससे हम इस नतीजे पर पहुंच सकें कि किन वर्गों को रियायती दर पर राशन दिया जाना चाहिए और किन वर्गों को नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार ने ऐसी कोई जानकारी हमारे समक्ष प्रस्तुत नहीं की है। यदि सरकार हमें वह जानकारी दे तब मैं निश्चय ही उस प्रस्ताव के बारे में अपने विचार प्रस्तुत कर सकता हूँ। इस समय मैं इतना कहना चाहता हूँ कि इमदाद दिये जाने की नीति बदल देना बिल्कुल नई बात है। मुझे पता चला है कि वर्ष 1946-47 से, जब इमदाद दी जाने लगी थी जो 22 करोड़ थी जो वर्ष 1951-52 में बढ़ कर 36 करोड़ हो गई, गत वर्ष के बजट में जो वित्त मंत्री ने लेखानुदान प्राप्त करने के लिए अस्थायी संसद में प्रस्तुत किया था, उन्होंने अनुमान लगाया था कि वह इस वर्ष लगभग 25 करोड़ की इमदाद दे सकते हैं। यह उनका अनुमान था। मुझे ऐसा विश्वास है कि जब उन्होंने बजट पेश किया था तब वह इतना खर्च करने का वचन देने को मानसिक रूप से तैयार थे। उसके बाद अचानक ही यह परिवर्तन हो गया। कुछ कारण बताए गए हैं। एक कारण यह है कि इमदाद की राशि लगभग 55 करोड़ हो जाएगी। कुछ सदस्यों ने इसे 90 करोड़ तक बताया है। मुझे सही आंकड़ों की जानकारी नहीं है। किंतु मैं इतना कहना चाहता हूँ कि गत अस्थायी संसद में भी, जब बजट पेश किया गया था, सरकार 25 करोड़ तक इमदाद देने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने के लिए तैयार थी। मुझे यह बात समझ में नहीं आती कि सरकार उस वचन से क्यों मुकर रही है, अपने कर्तव्य का निर्वाह क्यों नहीं कर रही है। निश्चय ही......
माननीय सभापति : आपका समय समाप्त हो गया है। आप एक या दो मिनट और ले सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मुझे कुछ और भी कहना है। आपके द्वारा कृपापूर्वक दिये गये एक या दो मिनट में मैं अपनी बात समाप्त नहीं कर पाऊंगा। मैं अपना भाषण यहीं समाप्त करता हूँ।