309
मांग रही है कि यदि आप इमदाद देते हैं तो आपको औद्योगिक जनसंख्या और ग्रामीण जनसंख्या के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए। यह बहुत पुराना तर्क है। परंतु मुझे कोई ऐसा वित्त मंत्री अथवा खाद्य मंत्री याद नहीं आता, जो इस प्रकार से सहमत रहा हो, हालांकि एक के बाद एक अनेक मंत्री बने हैं-भारत सरकार का सदा यही विचार रहा है अथवा नीति रही है कि इमदाद देने के मामले में कुछ वर्गीकरण अवश्य किया जाना चाहिए....................
वित्त मंत्री (श्री सी. डी. देशमुख) : महोदय, मैं एक जानकारी देना चाहता हूँ। इमदाद की प्रणाली जिसके अंतर्गत केवल औद्योगिक नगरों को इमदाद दी जाती है, केवल गत वर्ष अपनायी गयी है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, ग्रामीण क्षेत्रों के लिये भी इमदाद दिये जाने की मांग कोई नयी मांग नहीं है। किसी भी भारत सरकार ने, जहाँ तक मुझे याद है, उस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
श्री सी. डी. देशमुख : मेरा कहने का अभिप्राय यह है कि गत वर्ष से पूर्वं इमदाद ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों को दी जाती थी, इसलिए ऐसा कोई विचार पैदा नहीं हो सकता।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि ऐसी बात है तो वित्त मंत्री मुश्किल में फंस जायेंगे। यदि आपने पहले इस मांग को स्वीकार किया है कि इमदाद सबको दी जानी चाहिए तो मैं नहीं समझता कि अब आप उससे पीछे क्यों हट रहे हैं।
श्री एच. एन. कुंजरू (उत्तर प्रदेश) : जो कुछ भी मांग रही हो, उन्होंने इस संबंध में कहा है कि इमदाद औद्योगिक नगरों को ही नहीं दी गयी, बल्कि सभी ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों को दी गयी है। क्या यह सच है? क्या इमदाद उन ग्रामीण क्षेत्रों को दी गई है जबकि प्रथम खाद्य नीति समिति की सिफारिश के अनुसार समूचे देश में भारी घाटे की स्थिति थी।
श्री सी. डी. देशमुख : मेरा कहने का अभिप्राय यह था कि गत वर्ष को छोड़कर इमदाद औद्योगिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं थी।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा विचार यह है चूंकि आप बहुत ही अच्छा नहीं कर सकते तो स्थिति को जितना बेहतर बनाए रख सकते हैं, बनाए रखिए, ताकि वह और खराब न हो। जनता का जितना भला कर सकते हैं, कीजिए। ऐसी स्थिति में, आपके सीमित साधनों को ध्यान में रखते हुए देश आपको क्षमा करने के लिये तत्पर रहेगा। परंतु बजट में 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने के बाद भी यदि आप भलाई का काम नहीं करेंगे तो जनता को शिकायत करने का पूरा अधिकार होगा।