45. बजट (साधारण) 1952-53 - Page 330

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विभिन्न योरोपीय देशों के बजट में विस्तार से उल्लेख किया जाता है, कोई स्थान नहीं होता था। न केवल शासन में इन बातों का कोई स्थान था बल्कि सरकार ने स्वयं भी इस दायित्व को कभी स्वीकार नहीं किया था। हमने सोचा था और हमें आशा भी थी कि जब यह देश स्वतंत्र हो जाएगा, तो इस विषय का वह पहलू भी बदल जाएगा कि सरकार कर वसूल करने वाली एजेंसी मात्र नहीं रहेगी और किसी गलत कार्य के लिए लोगों को दंड देने हेतु मजिस्ट्रेट वाला काम नहीं करेगी, बल्कि सरकार कुछ अधिक जिम्मेदारी संभालेगी और वे सभी काम करेगी जो 20वीं शताब्दी में सभी सरकारें निभाती हैं। महोदय, क्या इस सदन में प्रस्तुत बजट के सूक्ष्म अध्ययन के पश्चात् कोई व्यक्ति कह सकता है कि इसमें सरकार ने कोई नई बात कही है, क्या इसमें किसी ऐसे कार्य का उल्लेख है जो सभी आधुनिक सभ्य सरकारें कर रही हैं। मुझे इसमें कोई ऐसी बात नजर नहीं आती। हम अंग्रेजों के समय के इतिहास को दोहरा रहे हैं अर्थात् कर वसूल करना और अपराधियों को दंड देना। विश्व में व अन्य देशों में गरीब और निचली जातियों को पहुंचाए जाने वाले सामाजिक लाभ हेतु इसमें कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मैं वित्त मंत्री से पूछना चाहता हूँ कि क्या वह हमको वचन देंगे, जैसे कि वह खाद्य इमदाद के संबंध में देते रहे हैं कि हम वर्ष 1952 तक आत्मनिर्भर हो जाएंगे, यदि वर्ष 1952 में नहीं तो वर्ष 1956 में हो जाएंगे और यदि वर्ष 1956 में भी नहीं तो वर्ष 1960 में तो हो ही जाएंगे? यदि कोई दिन निश्चित होता है अथवा नई प्रणाली आदि का दिन निर्धारित होता है तो आशा बनी रहती है। क्या वह हमको बतायेंगे कि जहाँ तक सामाजिक सेवाओं का संबंध है क्या वह विदेशों द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करेंगे? वह इस बात से इंकार करते हैं। बजट में सारी व्यवस्था, यदि संक्षेप में कहा जाए, जैसा कि मेरे पूर्व वक्ताओं ने भी कहा है, कि संपूर्ण विषय का सार यह है कि धनराशि का अधिकांश भाग सेना द्वारा उपयोग किया जा रहा है जो इस देश की जनता के लिए अपेक्षित है। हमारे देश का कुल बजट 404 करोड़ रुपये का है जिसमें से लगभग 200 करोड़ रुपये सेना पर खर्च कर दिए जाते हैं। इस स्थिति को समझना बहुत कठिन बात है। महोदय, जब शांति स्थापित हो गई थी, तब सैन्य विघटन का आदेश पास किया गया था। उस समय तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने भारत की सेना को कम करने का निर्णय लिया था। परंतु आज स्थिति क्या है? हम देखते हैं कि वर्ष 1947 में भारत सरकार का राजस्व लगभग 172 करोड़ रुपये था। मैं उस आठ महीने के बजट की बात कर रहा हूँ जो अगस्त 1947 से अप्रैल 1948 तक के लिये पेश किया गया था। उस समय सैन्य बजट 90 करोड़ रुपये का था। आज हमारा राजस्व बढ़ कर 404 करोड़ रुपये हो गया है। और हमारा सैन्य खर्च भी लगभग 200 करोड़ रुपये हो गया है। यह एक असाधारण स्थिति है कि जैसे-जैसे हमारा