319
की बैठक होगी जिसमें निर्णय लिया जाएगा कि इसकी राजधानी कौन-सी होगी? क्या इस नए राज्य की कार्यपालिका सरकार निर्णय करेगी कि नए आंध्र राज्य की राजधानी अमुक स्थान पर होगी? विधेयक में इसका उल्लेख नहीं है कि राजधानी बनाने के लिए कौन प्राधिकृत है। समाचार-पत्रों को पढ़ने से अवश्य पता चलता है कि राजधानी बनाने के मामले पर आंध्रवासियों में मतैक्य नहीं है। कुछ लोग विजयवाड़ा चाहते हैं और कुछ कुरनूल चाहते हैं और जो कुरनूल के पक्ष में हैं, वे संभवतः एक मत से जीते हैं। इस प्रकार की स्थिति में, मेरे विचार में सरकार नहीं गिरती है-मुझे पक्का भरोसा है भारी बहुमत के साथ उसे विपक्ष से किसी प्रकार का कोई ख़तरा नहीं है, यदि वह साहस बटोर कर कहती कि उनके निर्णय के अनुसार ‘‘कोई अमुक स्थान राजधानी बनाया जाना चाहिए,’’ और बाद में उसे बदलने की, यदि आंध्रवासी चाहें, छूट दे देते। महोदय, राजधानी के इस प्रश्न के संबंध में, मैं एक अन्य बात का उल्लेख करना चाहता हूँ। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि आध्र राज्य की राजधानी के लिए किस स्थान को चुना जाना है परंतु प्रत्येक व्यक्ति यही सोचता है कि जिस नगर को राजधानी के रूप में चुना जाएगा, वह अस्थायी राजधानी होगी। मैंने यही सुना है। अब, मैं सोचता हूँ कि चाहे वे विजयवाड़ा चुनें या कुरनूल अथवा कोई अन्य स्थान चुनें, उनको राजधानी के लिए आवश्यक भवन निर्माण पर कुछ धनराशि तो खर्च करनी पड़ेगी। निश्चय ही, वहाँ पर एक सचिवालय होना चाहिए और मंत्रियों के लिए आवास भी होने चाहिए.............. श्री सी. जी. के. रेड्डी (मैसूर) : यह बहुत महत्वपूर्ण है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : और इसी प्रकार के अनेक काम करने होंगे, तभी राजधानी
| vE | cMs |
|---|
का स्वरूप बनेगा। मुझे इस बात का कोई अनुमान नहीं है कि नयी आंध्र सरकार इस अस्थायी राजधानी के निर्माण पर कितनी धनराशि खर्च करने का विचार रखती है। जब यह कहा जा रहा है कि यह अस्थायी राजधानी होगी और स्थायी राजधानी का चयन बाद में होगा तो फिर क्या होगा? मेरे विचार में, होगा यह कि अस्थायी राजधानी के निर्माण पर आरम्भ में जो लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, वे व्यर्थ ही चले जाएंगे और आंध्रवासी अपने नए राज्य के लिए जिस स्थान को स्थायी राजधानी बनाने का निर्णय करेंगे, उस पर पांच या दस करोड़ रुपये पुनः खर्च करने पड़ेंगे। मुझे तो इस बात की जानकारी नहीं है कि क्या माननीय गृह मंत्री अथवा माननीय वित्त मंत्री, जो मेरे विचार में बहुत ही दयालु हैं और भी व्यक्ति आकर अनुदान मांगता है और वे दे देते हैं। वह पहले अस्थायी राजधानी के लिए पांच करोड़ रुपये और फिर स्थायी राजधानी के लिए पांच या दस करोड़ देने के लिए तैयार होंगे। यदि ऐसी बात है तो इस देश के वित्त प्रबंधन का यह निश्चय ही विचित्र तरीका होगा।
महोदय, नए राज्य की वित्तीय स्थिति पर विचार करते हुए यह दर्शाया गया है