320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि नए राज्य का आरंभ 5 करोड़ के घाटे की व्यवस्था से होगा। अनेक आशावादी आध्रवासियों ने, जो स्थिरता से भी अधिक आंध्र राज्य बनाये जाने में रुचि रखते हैं, जांचकर्ता श्री जस्टिस वांचू को बताया है कि उनके विचार में, अनेक साधन उपलब्ध हैं जिनसे वे इस अंतर को पाट सकेंगे और राज्य को आत्मनिर्भर बना लेंगे।
श्री जस्टिस वांचू ने प्रत्येक सुझाव पर विचार किया है, जो उनको आंध्र के विभिन्न पक्षों द्वारा दिये गये थे और उन्होंने बिल्कुल निभ्रांत रूप से कहा है कि ये सब कोरी कल्पनाएॅं हैं और इससे न तो नए राज्य के राजस्व में वृद्धि हो सकती है और न ही व्यय में कमी आ सकती है। वैसे राजस्व में वृद्धि करके अथवा व्यय को कम करके कुछ भी किया जा सकता है। फिर भी नए आंध्र राज्य का कामकाज 2 करोड़ रुपये के घाटे की व्यवस्था से आरंभ होगा। यह कम से कम है जिससे आंध्रवासियों को काम चलाना होगा। अब यह चिंता तो आंध्रवासियों की है कि क्या वे 5 करोड़ रुपये का अथवा 2 करोड़ रुपये का घाटा पूरा कर सकेंगे या नहीं, इस बारे में हमें कुछ नहीं कहना है, यह काम उनका है।
इसके बाद तीसरा मुद्दा आता है जो मैं अपने माननीय मित्र गृहमंत्री से कहना चाहता हूँ। ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे माननीय मित्र ने आंध्र राज्य के जन्म मृत्यु संबधी आंकड़ों पर ध्यान नहीं दिया है। इस राज्य की सामाजिक स्थिति क्या है? जब मैं आंध्र की सामाजिक स्थिति की बात करता हूँ तो मेरा अनुरोध है कि आंध्र के भाई मुझे गलत न समझें। ऐसी बात नहीं है कि मैं कोई बयान दे रहा हूँ। मैं आंध्रवासियों पर कोई दोषारोपण नहीं कर रहा हूँ परंतु यह एक सामान्य प्रस्ताव है जिसकी मैं व्याख्या कर रहा हूँ और अपने भाषण की समाप्ति पर मैं इस बारे में विस्तार से बोलूंगा।
महोदय, जैसा कि मैंने पहले बताया था मैं आंध्रवासी नहीं हूँ। फिर भी, मेरा एक राजनीतिक ग्रुप के साथ संबंध है-मैं उसको पार्टी नहीं कह सकता क्योंकि वह एक आदर सूचक शब्द है-जिसे शिड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन (अनुसूचित जाति परिसंघ) कहा जाता है। उस ग्रुप का नेता होने के कारण मुझे आंध्र के क्षेत्रों में घूमने का अवसर मिला है जिसके परिणामस्वरूप आंध्र प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों की स्थिति के बारे में मुझे जानकारी प्राप्त हो सकी है। मेरी जानकारी इस प्रकार है-इस आंध्र प्रदेश में, जैसाकि सभी स्थानों पर है, कुछ बड़े समुदाय हैं और कुछ बहुत ही छोटे समुदाय हैं। बड़े समुदायों में सबसे बड़ा समुदाय रेड्डी जाति का है, उसके बाद दूसरे नम्बर का कम्मा समुदाय है, उसके बाद काप्पू और उनके नीचे अभागे अनुसूचित जाति के लोग आते हैं, जो भूमिहीन श्रमिकों के रूप में काम करते हैं। मुख्य तौर पर इस प्रदेश का यह चित्र है। जैसे कि मैंने कहा कि यह मामला अकेला