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के मन में बड़ी भारी आशंका थी कि आंग्ल प्रोटेस्टेट लोगों की बहुसंख्या के रहते उनका क्या होगा और वे संयुक्त कनाडा के संविधान को अंगीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए वहाँ की संसद ने कनाडा के संविधान में धारा 93 जोड़ी। इस धारा के परिणामस्वरूप दो बातें हुईं। इसमें उल्लिखित है कि यदि कोई प्रांत स्वभावतः प्रोटस्टेंट क्षेत्रों वाले प्रांत से ही अभिप्राय था- जहाँ रोमन कैथोलिक्स रहते हैं, किन्हीं ऐसे मामलों के बारे में कोई कानून पास करते हैं जिसको रोमन कैथोलिक अपने धर्म के आधार पर विशेषाधिकार समझते हैं तो वे गवर्नर जनरल से अपील कर सकते हैं कि उनके साथ अन्याय किया गया है और गवर्नर जनरल की धारा 93 के अधीन उस शिकायत की जांच करने का अधिकार है। शिकायत करने का यह सांविधिक अधिकार है। धारा 93 के अधीन कैथोलिक्स बहुसंख्या के किसी कानून के रद्द कराने के लिए अपील के लिए अधिकार ही नहीं दिया गया बल्कि इसके आगे गवर्नर जनरल को कैथोलिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए सकारात्मक कानून बनाने का भी अधिकार दिया गया है। मैं अपने मित्र गृहमंत्री से यह पूछना चाहूँगा कि क्या कनाडा के संविधान में धारा 93 जोड़े जाने से वह कनाडा के संविधान को लोकतांत्रिक समझते हैं या अलोकतांत्रिक। इसका वह क्या उत्तर देंगे?
डॉ. के. एन. काटजू : मेरा उत्तर है कि संविधान का प्रारूप आपने तैयार किया है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप अपनी त्रुटियों के लिए मुझे जिम्मेदार बताना चाहते हैं?
माननीय सभापति : उनके कहने का अभिप्राय यह है कि उन्होंने वर्तमान संविधान को सही ठहराया है क्योंकि यह बहुमत का निर्णय था। आप आगे बोलिए।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, इसलिए मेरा निवेदन है कि यदि धारा 93 के अधीन गवर्नर जनरल को दी गई शक्तियाँ यहाँ पर राज्यपाल को दी जाती हैं तो इससे लोकतंत्र तथा लोकतांत्रिक संविधान का कोई अहित नहीं होगा। इससे तो हर प्रकार से, कुछ छोटे भाषायी क्षेत्रों या भाषायी ग्रुपों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी जो सोचेंगे कि राज्य में बहुसंख्यक वर्ग उनके साथ न्याय नहीं कर रहा है।
मैं दूसरा सुझाव अंग्रेजों के संविधान के आधार पर देना चाहूँगा। मेरे माननीय मित्र को ब्रिटिश संविधान में स्कॉटलैंड की स्थिति की जानकारी होगी और इसीलिए मैं उनके ब्यौरे में नहीं जाना चाहता। परंतु उनको दो बातें याद होंगी। एक यह कि यद्यपि स्कॉटलैंड और इंग्लैंड एक ही देश है- उनको कोई अलग-अलग देश नहीं