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माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर, यह तो अलग बात है।
अब, महोदय, मुझे बताया गया है कि दो प्रांतों से ही मंत्री बनाए जाते हैं। मंत्रिमंडल के चतुर सदस्य किसी विशिष्ट क्षेत्र में संसाधनों के विकास हेतु पूरी धनराशि प्राप्त कर लेते हैं और दूसरे क्षेत्रों को कुछ भी नहीं मिलता। रायल सीमा क्षेत्र के संबंध में भी यह बात कही जाती है कि तटवर्ती लोग अपने क्षेत्र के लिए आमतौर पर बड़ी धनराशि प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं और रायल सीमा के लोगों को कुछ भी नहीं मिलता। यदि मेरे माननीय मित्र इस संविधान में यह व्यवस्था कर दें कि इसी विधेयक के अंतर्गत विधि अनुसार एक समिति गठित की जाएगी जिसमें रायल सीमा से संबंधित सदस्य शामिल किए जाएंगे और जिनको राज्यपाल तथा मंत्रिमंडल के सदस्यों को अभ्यावेदन देने का अधिकार होगा कि उनके क्षेत्र से संबंधित सदस्यों को भी मंत्रिमंडल में सम्मिलित किया जाए तो मेरे विचार में, उनकी अधिकतर शिकायतें दूर हो जाएगी। इसी प्रकार, महोदय, हमारे बंगाली सदस्य भी इस बात को लेकर बहुत उत्तेजित हैं कि बिहार का कुछ भाग बंगाल है। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। हो भी सकता है, क्योंकि मूलतः बंगाल काफी फैला हुआ था गवर्नर जनरल के पास बहुत बड़ा क्षेत्र था और जहाँ कहीं भी गवर्नर जनरल जाता था, बंगाली भी उनके साथ जाते थे।
माननीय सभापति : आप आंध्र विधेयक पर बोलिए।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जी हाँ, मैं केवल उदाहरण दे रहा था। कल्पना कीजिए कि यह बात सही है कि बिहारी लोग बंगालियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करते। तब इस समस्या का समाधान करने का एक ही तरीका है कि विधानमंडल की एक समिति बनाई जाए जिसमें बंगाली सदस्य हों और जिनको अपनी शिकायतें मंत्रिमंडल को व राज्यपाल अथवा राष्ट्रपति को भेजने का अधिकार प्राप्त हो। जब ये सभी प्रयास असफल हो जाएं, तो फिर हमारे पास एक ही चारा रह जाता है कि हम भाषायी राज्य बनाएं, और फिर एक रूप में भारत के दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे। यदि यही हमारा अंतिम लक्ष्य है तो परमात्मा ही हमें बचा सकता है। किंतु महोदय, मैं अपने माननीय मित्र से अनुरोध करूंगा कि वह मेरे कुछ सुझावों पर विशेषकर, मैंने जो सुझाव अंत में दिया है ध्यानपूर्वक विचार करें और देखें कि क्या वह मेरे सुझावों के आधार पर भाषायी प्रांतों की समस्या का समाधान ढूंढ़ने में सफल हो सकते हैं। इसके लिए यदि वह चाहें तो एक नया विधेयक ला सकते हैं, भले ही वह ऐसा न करना चाहें, फिर भी ऐसा करना पड़ा सकता है।
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