47. संपदा शुल्क विधेयक, 1953 - Page 345

328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बंबई) : सभापति महोदय, वित्त मंत्री द्वारा इस सदन

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में रखे गए इस विधेयक के संबंध में मैं कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहूँगा। मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूँ, किंतु इसके साथ ही मेरे विचार में कुछ बातों का स्पष्टीकरण अपेक्षित है। मेरे विचार में संपदा शुल्क वसूल करने के लिए यह जानना परमावश्यक है कि मृत व्यक्ति कितनी संपदा छोड़कर गया है। जहाँ तक इस विधेयक का संबंध है, मैं अब तक यह नहीं जान सका कि अधिनियम के अधीन जो प्राधिकरण बनाए गए हैं, वे इस बात का कैसे पता लगाएंगे कि मृत व्यक्ति कितनी संपदा छोड़ गया है। विधेयक की धारा 4 में तीन प्राधिकरणों के नामों का उल्लेख हैः बोर्ड, संपदा शुल्क नियंत्रक और मूल्य निर्धारक। इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए इन प्राधिकरणों द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा पीछे छोड़ी गई संपदा की जानकारी प्राप्त करना मेरे विचार में बहुत ही कठिन काम है।

सबसे पहले तो उनके लिए यह पता लगाना ही कठिन है कि कौन व्यक्ति मरा और वह कब मरा। इस देश में काफी लंबे समय से शिकायत की जाती है कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसके अंतर्गत बच्चे के जन्म, लड़की या लड़का, अथवा किसी परिवार में किसी की मृष्त्यु की सूचना नगरपालिकाओं या गांव के प्राधिकारियों के पास दर्ज कराना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति चाहे तो वह दर्ज करवा सकता है। गांवों में सबसे निचले ग्रेड का एक गांव अधिकारी होता है, उसकी ड्यूटी होती है कि वह गांव के पटेल को जाकर बताए कि गांव में अमुक व्यक्ति के घर बच्चा पैदा हुआ है। वह ऐसा करे या न करे या वह बहुत समय के बाद करे। नगरपालिकाओं में, मैं बम्बई नगरपालिका की बात कर रहा हूँ, जो सबसे बड़ी नगरपालिकाओं में गिनी जाती है-सब जानते हैं कि वहाँ भी यह बात अनिवार्य नहीं है कि कोई व्यक्ति नगरपालिका को सूचित करे कि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है यद्यपि किसी मृत व्यक्ति को दफनाने या जलाने के लिए सरकारी अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। मेरा अपना

* संसदीय वाद-विवाद (राज्य सभा), खंड- 4, ख, 18 सितम्बर, 1953, पृ. 2805-15