47. संपदा शुल्क विधेयक, 1953 - Page 346

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अनुभव यह है कि प्रायः व्यक्ति को जब श्मसान में ले जाते हैं, तो वहाँ मामूली क्लर्क होता है, जिसको हम चार आने देते हैं और वह हमको एक टिकट का प्रतिपत्र देता है जिसमें लिखा होता है ‘‘ठीक है, आप शव लाए हैं और आप इसको दफ़ना या जला सकते हैं जैसे भी आप के यहाँ रस्म-रिवाज चलता हो।’’ मुझे पता नहीं यह प्रमाण-पत्र विशेष-जिसे मष्त्यु प्रमाण-पत्र कहा जा सकता है- किसी को कितना लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। शायद इसको किसी मिल के प्रबंधक को दिखाया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति मर गया है, मैं उसका संबंधी हूँ और उसका शेष वेतन जो आपके पास हो, मुझे दे दिया जाए। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं कि श्मसान में नियुक्त क्लर्क नगरपालिका को इस बात की सूचना देता है या नहीं कि अमुक व्यक्ति मर गया है, और उसका शव वहाँ पर लाया गया था जिसे जला दिया गया था या दफ़ना दिया गया था। इस देश में जन्म व मृत्यु पंजीकरण की यह स्थिति है।

महोदय, मेरा निवेदन यह है कि इस अधिनियम के अधीन बनाए गए प्राधिकारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाकर यह पता लगाना बहुत कठिन है कि कौन व्यक्ति मरा है। इंग्लैंड में संपदा शुल्क संबंधी कानून लागू करना केवल इस कारण सरल है कि वहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी वसीयत लिखने के बाद मरता है, और जहाँ तक इस बात का संबंध है, किसी व्यक्ति को प्रमाणित वसीयत प्राप्त करनी होती है। सदन इंग्लैंड के ऑफिसर्स को, जैसाकि उनको इंग्लैंड में कहा जाता है- जो आंतरिक कर व्यवस्था के अंतर्गत काम करते हैं-इस बात का पता लगाने के लिए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के पास जाना पड़ता है कि क्या प्रमाणित वसीयत लेने के लिये कोई आवेदन प्राप्त हुआ है। यदि हाँ, तो उससे वे पता लगा लेते हैं कि कौन व्यक्ति मरा है, उसकी कितनी सम्पदा थी जो उस आवेदन-पत्र में दर्शायी गई है। परंतु दुर्भाग्य से, हमारे देश में प्रमाणित वसीयत प्राप्त करने की किसी को आदत ही नहीं है। निःसंदेह एक नियम है कि जहाँ तक भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम का संबंध है, यदि कोई वसीयत है तो उसकी प्रमाणित इच्छा-पत्र अधिनियम के अधीन प्रमाणित प्रति प्राप्त करनी होगी। यदि किसी व्यक्ति पर भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम लागू नहीं होता तो भी यदि वसीयत छोड़ी गयी है तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अधीन वसीयत की प्रमाणित प्रति प्राप्त की जा सकती है। हमारे देश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। मैं स्वयं हैरान हूँ कि यदि मेरे मित्र मुझे इस विधेयक के अधीन संपदा शुल्क नियंत्रक नियुक्त करें, तो मैं क्या करूंगा, मृत व्यक्तियों की सूचना पाने के लिए कहाँ जाऊंगा? इस काम के लिए काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। इस विधेयक में एक तो यही कमी है।

इस विधेयक में मैंने जो दूसरी बात पायी है, वह यह है। विधेयक के खण्ड 17 में माननीय सदस्य ने बताया है कि संपदा शुल्क किसको अदा करना है। यदि मृत व्यक्ति का हित किसी नियंत्रित कंपनी में है तो नियंत्रित कंपनी का कोई प्रतिनिधि