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गया था और उन्होंने अपनी आय संबंधी विवरण्ियों में कुल कितनी आय दिखायी थी। इसलिए, महोदय, मेरे विचार में, इस कर का प्रभाव काफी हद तक इस देश के संयुक्त परिवारों पर पड़ेगा और वर्ष 1950-51 के लिए राजस्व बोर्ड की रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर यह पता लगाना संभव होगा कि वित्त मंत्री इस संसाधन से कितना राजस्व प्राप्त होने की आशा करते हैं। यह जानकारी मिल जाने पर हम बड़े उत्साह से यह कहने की बेहतर स्थिति में होंगे कि कोई बात नहीं, जितना भी परिश्रम के अनुरूप धनराशि की वसूली नहीं हुई तो माननीय वित्त मंत्री को स्वयं इस विधेयक को लाने में किए गए परिश्रम पर दुःख होगा।
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं एक दूसरी बात की ओर आप का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। लोगों के मन में एक विचार है कि सम्पदा शुल्क और आय-कर में बहुत अंतर है। जबकि आय-कर के बारे में कुछ कटुता हो सकती है, सम्पदा शुल्क के बारे में ऐसी कोई कटुता नहीं हो सकती। दोनों में अंतर यह है कि आयकर आय पर लगाया जाता है जबकि सम्पदा शुल्क पूंजी के ऊपर कर होता है। निःसंदेह सतही तौर पर यह अंतर सही है क्योंकि जब हम संपदा शुल्क लगाते हैं, हम उसको आय में से नहीं लेते बल्कि हम उस पूंजी में से लेते हैं जो कोई व्यक्ति छोड़ कर चला गया है। आय-कर के मामले में हम व्यक्ति की चालू आय से कर लेते हैं। महोदय, मैं यह कहना चाहूँगा कि यह बिल्कुल सतही अंतर है। अन्त्तोगत्वा आय-कर और संपदा शुल्क में कोई अंतर नहीं है क्योंकि संपदा शुल्क इससे अधिक कुछ नहीं कि वह जमा की गई आय, जिस पर एक स्थान पर कर लगाया जाता है और एक परिभाषित अवधि में लगाया जाता है अर्थात् जब कोई व्यक्ति मर जाता है। अब मुझे यह बात बहुत महत्वपूर्ण लगती है कि क्या आप जो कर व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर लगाते हैं, उसके कोई ऐसे परिणाम होंगे जिससे राजस्व का साधन समाप्त हो जाएगा अथवा क्या वह इतना अच्छा होगा और हमारा देश इतना सुनम्य है कि सम्पदा शुल्क के रहते हुए भी देश में उत्पादन बढ़ेगा और इससे कोई अंतर नहीं पड़ेगा कि आप सम्पदा शुल्क लगाएं और इससे कोई अन्यतर नहीं पड़ेगा कि कितनी ऊंची दर से लगाएं। मेरे माननीय मित्र मुझ से बेहतर तथ्य जानते होंगे परंतु मैं सदन को ग्रेट ब्रिटेन के कुछ आंकड़े बताना चाहता हूँ। मैंने वे वर्ष 1951-52 के राजस्व बोर्ड के प्रतिवेदन से लिए हैं। उनसे संबंधित आंकड़ों की जानकारी मिलती है। वर्ष 1942-43 में ग्रेट ब्रिटेन में वसूल किए गए आय-कर की कुल राशि 18 मिलियन पौंड थी और वर्ष 1951-52 में यह राशि 20 मिलियन पौंड थी। जहाँ तक मृत्यु से संबंधित शुल्कों की बात है, वर्ष 1942-43 में कुल वसूली 93,340,343 पौंड थी और वर्ष 1951-52 में कुल वसूली 182,600,643 पौंड थी। मैं चाहता हूँ कि सदन हमारे देश के संबंध में ऐसे आंकड़ों पर भी ध्यान दें।