47. संपदा शुल्क विधेयक, 1953 - Page 349

332 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

महोदय, मेरे माननीय मित्र वित्त मंत्री को हाल ही के इस प्रतिवेदन की जानकारी होगी जो यूनेस्को की एक कमेटी द्वारा तैयार की गयी थी। यूनेस्को की अनेक समितियाँ हैं। उनकी एक समिति ने इस बात का पता लगाने के लिए जांच-पड़ताल की थी कि दक्षिण एशियाई देश अपनी औद्योगिक व आर्थिक प्रगति के मामले में इतने पिछड़े हुए क्यों हैं। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि देश में बचत इतनी कम है कि वहाँ पूॅंजी निर्माण होता ही नहीं। पूंजी निर्माण न होने के कारण ही, वहाँ न कोई उद्योग स्थापित होते हैं और न ही कोई अन्य काम होते हैं। निःसंदेह, यदि हम साम्यवादी देश होते-और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम बहुत जल्दी बन ही जाएंगे-तो हमारे आर्थिक, औद्योगिक व कृषि संबंधी सभी कार्यकलाप अच्छा हो या बुरा हो और फिर इससे भी कोई अंतर नहीं पड़ता कि हम कितना कम बचा पाएं या न बचा पाएं। यदि हम कुछ बचा पाएं तो संभवतः सरकार हमें और बचत करने के लिये कहेगी और इसमें कोई कठिनाई भी न होगी। परंतु जब तक हमारे देश में साम्यवादी सरकार नहीं आती जो लोगों के कल्याण और उनकी शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी ले लेती है........

श्री बी. बी. शर्मा (उत्तर प्रदेश) : और उनकी दुर्गति के लिए.............

izn s'k

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। प्रत्येक व्यवस्था में कुछ अच्छाई व कुछ बुराई होती है। कोई भी व्यवस्था संपूर्ण नहीं होती।

माननीय सभापति : आप आगे बढि़ए।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे खेद है कि उन्होंने मेरे तर्कों की कड़ी को छिन्न-भिन्न कर दियाँ मैं यह कह रहा था कि जब तक हमारे देश में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं होती जो, जनता के कल्याण की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले और जब तक हमारे देश में यह व्यवस्था है कि जनता अपने कल्याण के लिये स्वयं उत्तरदायी है, ऐसी स्थिति में सरकार जनता की, उनके कल्याण के लिये सहायता करती है, उनका कल्याण नहीं करती, यह बहुत आवश्यक है कि हमारी कर प्रणाली ऐसी हो कि पूंजी निर्माण के लिये पर्याप्त धनराशि बच जाए, सरकार हर बार हमसे कुछ धनराशि ले लेती है और हमको आगे नहीं बढ़ने देती। महोदय, मेरे माननीय मित्र जो यह विधेयक लाए हैं, जितनी मुझे अपने अनुभव से जानकारी है, यह कोई नया कानून नहीं है। मुझे याद है कि पहली बार इस विधेयक की रूपरेखा 1944-45 में तैयार की गई थी। सर जेरेमी रायसमैन, जो उस समय वित्त मंत्री थे, ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा था कि अनुसूची-एक में उल्लिखित त्रुटि में जैसे ही संसद सुधार कर देगी वह संपदा शुल्क विधेयक के समान एक विधेयक पुरःस्थापित करेंगे। 1935 के अधिनियम में इस बात का बिल्कुल कोई उल्लेख नहीं था कि प्रांतों द्वारा अथवा केन्द्र सरकार द्वारा संपदा शुल्क जैसा कोई कर लगाया जाएगा। तत्पश्चात् वर्ष 1946 में सर आर्चिवाल्ड रोलेंड्स