18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इतना बड़ा आदेश है, जिसे मैं मात्र इस कारण स्वीकार नहीं कर सकता कि यद्यपि फिलहाल और इस विधेयक के प्रयोजनार्थ, हमने पारिश्रमिक का एक निश्चित आधार स्वीकार किया है और उस पारिश्रमिक के आधार पर ही हम निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि किस समिति को छूट दी जानी अपेक्षित है और किसे नहीं। संसद या सरकार के लिए उस पारिश्रमिक के आधार में परिवर्तन करना पूरी तरह संभव है। और यदि वे पारिश्रमिक के आधार में परिवर्तन करते हैं तो वह व्यापक प्रतिपादन हमारे लिए अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न करेगा क्योंकि व्यापक प्रतिपादन मामले को वास्तविकताओं से भिन्न होगा। इसलिए जैसा कि मैंने हमेशा कहा है, यह उचित है कि संसद इस शक्ति को अपने हाथ में रखे। बहरहाल, सरकार यह घोषणा नहीं कर सकती कि अमुक-अमुक व्यक्ति निरर्हित है। किसी को यह कहने के लिए उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार नहीं है कि कोई सदस्य निरर्हित है। अंततः संपूर्ण मामला संसद के हाथ में है और हम मामले को संसद के हाथों में छोड़ना चाहते हैं ताकि जब कभी मामला उत्पन्न हो तो संसद यह विनिश्चय कर सकेगी कि क्या यह ऐसा मामला है, जो निरर्हता के अंतर्गत आता है अथवा यह ऐसा मामला है जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए, यदि यह निरर्हता के अंतर्गत आता है। मैं सोचता हूँ कि यह अधिक अच्छा होगा कि उसी स्थिति में छोड़ देना चाहिए जिसमें मैं इसे छोड़ना चाहता हूँ न कि इसे और जटिल बनाया जाए ताकि कोई भी ठीक मौके पर इस गुत्थी को सुलझा सके।
श्री कॉमथ : क्या यह अंततः सदन के विशेषाधिकार का मामला नहीं है?
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डॉ. अम्बेडकर : मैं इस बात पर नहीं आना चाहता कि यह विशेषाधिकार है
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या नहीं। किंतु निश्चित रूप से यह संवैधानिक उपबंध है, जिसका पालन संसद से अपेक्षित है और संसद की संविधान के प्रति बहुत बड़ी गलती होगी यदि वह अनुच्छेद 102 के उपबंधों का उस समय अनुसरण नहीं करती है जब अंततः जैसा कि मैं कहता हूँ और विधेयक तैयार है और सरकार वास्तव में प्रत्येक मामले को विनिश्चित करने के लिए संसद के हाथ में छोड़ना चाहती है। श्री सिधवा के पास कुछ संशोधन था। किंतु क्या इस सदन में कोई अभी मुझे यह बता सकता है कि किन पदों या समितियों की संभावना है, जिन्हें सरकार इसके पश्चात् सृष्ट कर सकती है? मैं ऐसी बात की इस समय कल्पना नहीं कर सकता, यदि कोई मुझसे यह प्रश्न पूछे, ‘‘मुझे बताओ कौन सी समितियाँ हैं।’’ यदि आप इन सबको विधेयक में सम्मिलित करना चाहते हैं तो आपको उनकी जानकारी अवश्य होनी चाहिए और उन्हें परिभाषित किया जाना चाहिए। इसकी प्रत्याशा कोई नहीं कर सकता कि कौन सी समितियों के बनाए जाने की संभावना है।