340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सह-अस्तित्व की नीति का धन्यवाद देते हुए कनाडा और यूरोप के राजमर्मज्ञों के विचारों को मैंने पढ़ा है। उनकी प्रशंसा और उनके गुणगान का कम से कम मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। मैं उनके विचार और उनकी राय को कोई महत्व नहीं देता। कनाडा का राजनीतिज्ञ बड़ी सरलता से कह सकता है कि सह-अस्तित्व संभव है क्योंकि कनाडा, चीन और रूस से हजारों मील दूर है। इसी प्रकार इंग्लैंड भयानक प्रचण्ड अग्नि से अपने आपको निकाल लेने के बाद अब सोचता है कि वह अब कुछ करने में असमर्थ है और इसलिए वह सह-अस्तित्व के सिद्धांत का प्रतिपादन और समर्थन करता है। परंतु यहाँ भी दूरी की बात लागू होती है। व्यक्ति को यह नहीं भूलना चाहिए कि किसी देश की विदेश नीति में भौगोलिक पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। प्रत्येक देश की विदेश नीति भौगोलिक स्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकती है। कोई बात कनाडा के लिए अच्छी हो सकती है, परंतु हमारे लिए नहीं। जो बात इंग्लैण्ड के लिए अच्छी हो, वह हमारे लिए अच्छी नहीं भी हो सकती। इसलिए, मेरे विचार में, प्रधानमंत्री ने सह-अस्त्तिव का सिद्धांत अधिक सोच-समझ कर नहीं अपनाया।
महोदय, इसके बाद मैं ‘सीटों’ के बारे में कुछ शब्द कहना चाहूँगा। मैं सीटो के संबंध में प्रधानमंत्री के विचारों को बड़े ध्यान से सुन रहा था और मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि ‘सीटो’ के बारे में उन्होंने अपना कोई पक्का इरादा नहीं बनाया। यदि मैंने उनको ठीक से सुना है तो उन्होंने कहा है कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इस देश ने जेनेवा निर्णयों के अनुसार किसी आयोग का चेयरमैन बनना स्वीकार किया है, अतः इस कारण उनके लिए अथवा इस देश के लिए ‘सीटो’, में शामिल होना उपयुक्त होगा, नि‘संदेह एक साथ दो बातें असंगतिपूर्ण होंगी। लेकिन इसके अतिरिक्त, मेरे विचार में ‘सीटो’ के संबंध में गुण-दोष के आधार पर विचार करना चाहिए।
मेरे विचार में ‘सीटो’ में असंगति के दो कारण हैं। मेरे विचार में, मैं किसी गुप्त बात का रहस्य नहीं बता रहा हूँ और न ही मैं प्रधानमंत्री पर कोई ऐसा आरोप लगा रहा हूँ, जिसके बारे में वह अनभिज्ञ हों कि उनके और अमरीका के बीच कुछ नाराज़गी है, किसी कारणवश उनके और अमरीका के विचार परस्पर मेल नहीं खाते। मेरे विचार में, अमरीका से आए किसी विचार के प्रति हमेशा उनकी कुछ प्रतिकूल सोच का यही कारण है।
श्री बी. गुप्ता : क्या आप कोई संबंध जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं?
माननीय अध्यक्ष : प्रधानमंत्री शांत हैं, लेकिन आप बोलते जा रहे हैं।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : और दूसरा कारण यह है कि यदि भारत ‘सीटो’ में