342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
था कि यह देश किस प्रकार से एक ओर पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों से पूरी तरह घिरा हुआ है। मुझे पता नहीं कि भविष्य में क्या होने वाला है लेकिन चूंकि स्वेज़ नहर सौंप दिये जाने के कारण मिस्र और इंग्लैंड के बीच की रुकावट दूर हो गई है, मेरे विचार में अब मुस्लिम देशों के पाकिस्तान के साथ मिलने और उस ओर एक ब्लॉक बनाने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। इस ओर चीन द्वारा ल्हासा पर कब्ज़ा किए जाने की अनुमति देकर प्रधानमंत्री ने चीन की सीमा भारतीय सीमा के निकट ले आने में उनकी सहायता की है। इन सब बातों को देखते हुए मुझे ऐसा महसूस होता है कि इस बात पर विचार न करना नासमझी की बात होगी कि अब भारत पर आक्रमण नहीं किया जा सकता। भारत पर आक्रमण किया जा सकता है और शायद वही लोग आक्रमण करेंगे जिनका हमेशा से आक्रमण करने की आदत है।
अब मैं दूसरे प्रश्न पर आता हूँ। यदि हम ‘सीटो’ में शामिल होते हैं तो रूस क्या कहेगा? इस बारे में, मैं यह पूछना चाहता हूँ कि रूस की विदेश नीति की कुंजी क्या है? हमारी विदेश नीति की कुंजी अन्य देशों की समस्याओं का समाधान करना है, न कि अपनी समस्याओं का समाधान करना। हमारे देश में कश्मीर की समस्या है। हम उसका समाधान करने में सफल नहीं हुए हैं। सब लोग संभवतः भूल गए हैं कि वह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। लेकिन संभवतः हम एक दिन अचानक जागें और पाएं कि शैतान खड़ा है। मुझे पता चला है कि प्रधानमंत्री ने कश्मीर को भारत के साथ जोड़ने वाली एक सुरंग खोदने संबंधी परियोजना का प्रारम्भ किया है। महोदय, मेरे विचार में इससे कोई अधिक ख़तरनाक बात नहीं हो सकती जो प्रधानमंत्री कर सकता हो। फ्रांस को इंग्लैंड के साथ जोड़ने के लिये इंग्लिश चेनल के नीचे सुरंग बनाने की बात हमने सुनी थी। यह बात हम गत 50 वर्षों से सुनते आ रहे हैं। मेरे विचार में, किसी व्यक्ति ने प्रस्ताव रखा होगा और अब तक इस परियोजना को क्रियान्वित करने के लिये ब्रिटेन ने कोई कार्यवाही नहीं की है, क्योंकि यह दोहरी धार वाला हथियार है। कोई शत्रु यदि वह फ्रांस पर विजय पा लेता है तो उस सुरंग का उपयोग करके इंग्लैंड तक अपनी फौजें भेज सकता है और इंग्लैंड पर भी विजय पा सकता है। ऐसा भी हो सकता है। हमारे प्रधानमंत्री, सुरंग खोदकर, समझते हैं कि वह अकेले उसका उपयोग कर सकेंगे। वह यह नहीं समझते कि रास्ता दोनों तरफ जाता है और कोई विजेता जो दूसरी ओर से आता है और कश्मीर पर विजय पा लेता है, वह सीधे पठानकोट तक आ सकता है और संभवतः प्रधानमंत्री के निवास स्थान तक पहुंच सकता है-मैं नहीं जानता।
माननीय सभापति : समय अधिक हो गया है।
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