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हो रहा है कि यह सब कुछ क्यों हो रहा है। इंग्लैंड जिसने स्वेच्छा से इस देश की जनता को प्रभुसत्ता सौंप दी, एक दूसरे देश को ऐसा करने के विपरीत सलाह क्यों दे रहा है। यह बात समझ में नहीं आती। प्रधानमंत्री मेरे सुझाव को स्वीकार करें या न करें परंतु मुझे ऐसा महसूस होता है वे हमारे प्रधानमंत्री को बता देना चाहते हैं कि तटस्थ रहने का भी मूल्य-चुकाना पड़ता है।
श्री पी. सुंदरय्या : प्रधानमंत्री को इस बात पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं प्रधानमंत्री को एक सुझाव देना चाहता हूँ। यदि संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्य सदस्य पुर्तगाल का समर्थन कर रहे हैं, तो मेरे विचार में, हमें पुर्तगाल के साथ युद्ध नहीं करना चाहिए। परंतु इस बारे में मैं दो प्रस्ताव रखना चाहता हूँ। आपको याद होगा कि अमरीका का एक मामला स्टेट ऑफ लूसियाना के बारे में था जो अमरीकी बस्तियों में फ्रांस वाली बस्ती थी और अमरीका फ्रांस को वहाँ से निकालना चाहता था और लूसियाना को अमरीका के अधिकार में लेना चाहता था। उन्होंने उसका मूल्य देने का तरीका अपनाया था। जो मूल्य दिया गया था-उसके आंकड़े मेरे पास हैं।
श्री पी. सुंदरय्या : चांदी के कुछ सिक्के।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : बहुत बड़े क्षेत्र के लिए बहुत ही कम मूल्य दिया गया था। गोआ उसकी तुलना में कुछ भी नहीं है। गोआ लूसियाना के एक कस्बे के बराबर है। यदि प्रधानमंत्री यह तरीका अपनाना चाहें तो..................... श्री जवाहर लाल नेहरू : वह क्या है?
माननीय सभापति : पुर्तगाल से खरीद लो..............................
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस पर चर्चा की जानी चाहिए। मैं वैकल्पिक तरीकों के बारे में सुझाव दे रहा हूँ।
माननीय सभापति : यह एक सुझाव है। दूसरा क्या है?
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : प्रधानमंत्री के समक्ष मैं जो दूसरा सुझाव रखना चाहता हूँ वह यह है कि हम गोआ को पट्टे पर ले सकते हैं। हमें अपने ही देश में बरार के पट्टे की जानकारी है। बरार निज़ाम की संपत्ति था। उसका उस पर प्रभुत्व था परंतु ब्रिटिश सरकार ने लगभग 1853 में बरार को स्थायी पट्टे पर ले लिया था। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि उन्होंने कितनी धनराशि निज़ाम को दी थी। संभव है वह बहुत कम हो।
श्री बी. गुप्ता : यदि हम ऐसा करते हैं तो हमें भारत की प्रतिष्ठा को गिरवी रखना होगा।