49. बैंक विवादों के संबंध में सरकारी आदेश - Page 366

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विचार में बहुत से लोग इस बारे में कुछ पूछताछ करना चाहेंगे, परंतु यह तो एक नींव है जिस पर ये सभी परिवर्तन आधारित हैं।

पहली बात, जिसकी ओर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ, वह यह है, वास्तव में इस समय सेन अवार्ड प्रवर्तन में है। यह वर्ष 1951 से प्रवर्तन में है। शास्त्री के वेतन-मानों की अपेक्षा इसके वेतनमान निश्चित ही काफी अधिक हैं। अब बात यह है कि न्यायमूर्ति सेन द्वारा 1951 में दिया गया यह अवार्ड प्रवर्तन में है और सरकार ने विशेष अध्यादेश जारी करके इसको लागू किया था क्योंकि इस के गठन में कोई तकनीकी दोष होने के कारण कुछ बैंक व्यवस्थाओं के आवेदन-पत्र उच्चतम न्यायालय ने सेन अवार्ड को अवैध करार दिया था और इसीलिए सेन समिति को अवार्ड देने का अधिकार नहीं था। जब बैंक प्रबंधकों ने कर्मचारियों के वेतन को कम करना आरंभ कर दिया तब सरकार ने हस्तक्षेप किया और अध्यादेश जारी करके घोषणा की कि वेतनों को स्थिर कर दिया गया है जिसका अर्थ यह है कि सेन अवार्ड के अंतर्गत कर्मचारियों को जो भी दिया गया था, वह उनको मिलता रहेगा। यद्यपि उच्चतम न्यायालय में अवार्ड को अवैध ठहराया है। अब, महोदय, यह एक ऐसा साक्ष्य है जिससे पता चलता है कि यह तर्क कि यह अवार्ड यदि बैंकों को लागू करना पड़ेगा तो उनको पर्याप्त लाभ नहीं होगा, मुझे निरर्थक प्रतीत होता है।

तत्पश्चात् हम रिज़र्व बैंक की एक पुस्तिका, जिसे मेरे विचार में ‘‘द ट्रेंड ऑफ़ इवेंट्स’’ या कुछ ऐसा ही नाम दिया गया, में दिए गए आंकड़ों की तुलना करते हैं। इसमें वर्ष 1949 से 1953 तक के आंकड़े उपलब्ध हैं। इनमें से मैंने केवल संबंधित आंकड़े निकाले हैं। अब ‘क’ वर्ग के बैंकों में इस अवधि में कार्यपूंजी में 10 प्रतिशत की कमी आई है। कुल आय 20 प्रतिशत बढ़ी है और लाभांश में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ‘ख’ वर्ग के बैंकों में जमा राशि में 13 प्रतिशत की कमी हुई है, कार्यपूंजी में भी 13 प्रतिशत की कमी आई है परंतु कुल आय में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ‘ग’ वर्ग के बैंकों में, जमाराशि में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, कार्यपूंजी में भी 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और कुल आय में भी वृद्धि वृद्धि हुई है तथा लाभांश में भी वृद्धि हुई है। जहाँ तक ‘घ’ वर्ग के बैंकों का संबंध है, मेरे विचार में, वे सबसे

खुशहाल हैं क्योंकि उनकी स्थिति में, सभी प्रकार से जमा राशि में, कार्यपूंजी में, कुल आय में और लाभांश में वृद्धि हुई है। अब महोदय, इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वर्ग ‘क’ और वर्ग ‘ख’ के बैंकों के लाभ में कुछ कमी हुई है। इसके कारण क्या हैं? क्या इसका कारण वेतन वृद्धि है अथवा इसका कारण कुछ और है? मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि जमाराशि कम हुई है और ब्याज की दर बढ़ा दी गई है। जिसके कारण उनको कुछ कम लाभ हुआ है। और निश्चय ही यह नहीं कहा जा सकता कि इस प्रचार के परिणामस्वरूप वेतन वृद्धि के कारण बैंकों की कोई हानि हुई है। इसलिए मेरा निवेदन यह है कि इस बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि