49. बैंक विवादों के संबंध में सरकारी आदेश - Page 367

350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वेतन वृद्धि के कारण लाभ कम हुआ है। उनमें निश्चय ही इस कारण कमी नहीं आई यद्यपि उनमें कमी आयी है। इसलिए न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित वेतन को कम करने के लिए पंचाट में फेर-बदल करने के तर्क को निश्चय ही स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जहाँ तक दूसरे परिवर्तन अर्थात् चतुर्थ वर्ग क्षेत्र बनाये जाने का संबंध है, मैं यह बात समझने में असमर्थ हूँ कि यह नया क्षेत्र बनाने की सरकार को क्यों आवश्यक अनुभव हुई। तीन अधिकरणों के समक्ष इन मामलों की सुनवाई हो चुकी है। श्रमिकों और बैंक प्रबंधकों के अनेक वकीलों ने बहस में हिस्सा लिया। निश्चय ही उनमें से किसी ने भी किसी भी वर्ग के बैंक के मामले में इसको आवश्यक नहीं समझा। फिर सरकार ने ऐसा करना क्यों आवश्यक समझा कि यह नया क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। मुझे यह बात समझ में नहीं आती।

फिर महोदय, तीसरा परिवर्तन-भाग ‘ख’ और भाग ‘ग’ के राज्यों में इसको लागू न करने के निर्णय को न्यायोचित ठहराना सबसे अधिक कठिन काम प्रतीत होता है।

माननीय सभापति : समय समाप्त हो रहा है।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने अभी कुछ और बातें कहनी हैं....................

माननीय सभापति : ठीक है, यथा संभव संक्षेप में बोलिए।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : धन्यवाद! इस बात को समझना बहुत कठिन है कि किस आधार पर भाग ‘ख’ और भाग ‘ग’ राज्यों के इन दो क्षेत्रों को इस अवार्ड के प्रवर्तन से छूट दी गई है। इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ यह है कि वर्ग 4 क्षेत्र के लिये सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतनमान अर्थात् 51 रुपये का न्यूनतम वेतन भाग ‘ख’ और भाग ‘ग’ राज्यों में लागू नहीं होगा। इसका तात्पर्य यह है वहाँ के कर्मचारियों को नियोजकों की कृपा पर छोड़ दिया गया है।

वे उनको अपनी मर्जी से कुछ भी दे सकते हैं। यह अलग बात है कि बैंक व्यवस्था आवश्यक है और बैंकों को लाभ अर्जित करना चाहिए। यह भी उचित बात है परंतु क्या हमें इस प्रकार के शोषण की अनुमति देनी चाहिए? यह तो पूरा शोषण है। कोई न्यूनतम मानदंड निर्धारित नहीं किए गए हैं। मेरे विचार में, इस बात को किसी प्रकार से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।

अब, फिर यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया की छूट के बारे में सरकार द्वारा प्रस्तावित चौथा परिवर्तन भी एक असाधारण बात है। जहाँ तक इस बारे में मैं जानकारी एकत्र कर सकता हूँ, मूलतः कलकत्ता में शरणार्थियों द्वारा अपनी सहायता के लिये चार बैंक आरंभ किए गए थे, मुझे विश्वास है ऐसा बैंक कारोबार चलाने के लिए किया गया था।

वित्त मंत्रालय में उप-मंत्री (श्री ए. सी. गुहा) : मेरे विचार में, माननीय सदस्य की यह