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बात ठीक नहीं है। विभाजन से बहुत पहले से बैंक चल रहे हैं विभाजन के पश्चात् वे एक बैंक में आमेलित कर दिये गये।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई। इससे मेरी बात को
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समर्थन मिलता है। मेरे तर्क का आधार बहुत कमज़ोर था। मैं मान लेता हूँ कि बैंक व्यवसाय काफी लंबे समय से चल रहा था, लेकिन वे आमेलित कर दिए गए।
श्री ए. सी. गुहा : वे लंबे समय से तो चल रहे थे परंतु स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरी जानकारी के अनुसार, इस बैंक की कार्यपूंजी 33 करोड़ रुपये है। मेरे मित्र इस बात से इंकार भी कर सकते हैं और मेरी गलती को दुरूस्त भी कर सकते हैं। इस बैंक की पूंजी लगभग 33 करोड़ रुपये है। अब वर्गीकरण के अनुसार, जिसे सेन अवार्ड, शास्त्री अवार्ड और अपील अधिकरण द्वारा अपनाया गया है, इस बैंक को ‘क’ श्रेणी के बैंकों में रखा जाना चाहिए क्योंकि ‘क’ वर्ग के बैंक ऐसे बैंक हैं जिनकी कार्यपूंजी 25 करोड़ रुपये या इससे अधिक है। अतः निश्चय ही इस बैंक को ‘क’ वर्ग में रखा जाना चाहिए और सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान इस बैंक में भी लागू होने चाहिए। प्रकट रूप में ऐसा न करने का कोई कारण दिखाई नहीं देता। यह स्पष्ट है कि यह बैंक किन्हीं कारणों से, जो मैं समझ नहीं पाया, कठिन स्थिति का सामना कर रहा था। उसने शास्त्री समिति से अनुरोध किया था और कुछ छूट की मांग की थी। शास्त्री कमेटी ने इसको 31 दिसंबर, 1954 तक छूट दी थी। उन्होंने कहा था कि उस तारीख के बाद उस पर अवार्ड लागू हो जाएगा। जब यह मामला अपील के विचारार्था भेजा गया, तब इस बैंक ने, जो शास्त्री कमेटी द्वारा दी गई रियासत से संतुष्ट नहीं था, और छूट देने के लिए पुनः आवेदन किया और अधिकरण ने छूट की अवधि को दिसंबर 1955 तक बढ़ा दिया। सरकार ने अपनी अधिसूचना में इन परिवर्तनों का उल्लेख किया जो वह करना चाहती है। इसमें कहा गया है ‘‘यह अवार्ड इस बैंक पर बिल्कुल लागू नहीं होगा।’’ मेरे विचार में, मेरे मित्र का तात्पर्य, यह नहीं है कि यह अवार्ड उन पर कभी भी लागू नहीं होगा। मुझे आशा है कि यह उन पर कभी तो लागू होगा। इस बात का कोई औचित्य तो होना चाहिए कि सरकार इस बैंक विशेष का इतना अधिक पक्ष क्यों ले रही है कि उसको पिछले दो न्यायाधिकरण द्वारा दी गयी सीमित अवधि की रियायत की अपेक्षा एकदम पूरी छूट दे दी। इस बात का कोई औचित्य नहीं है।
अब कुछ अन्य बातें हैं जिनकी ओर मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। मैं समझता हूँ कि सरकार को कुछ पहलुओं के संबंध में अवार्ड में परिवर्तन करना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं किया गया और पहली बात जिसमें मेरे विचार में सरकार को परिवर्तन करने के बारे में सोचना चाहिए था वह वर्गीकरण करने की प्रणाली थी