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12 एक्सचेंज बैंक ऐसे थे जो सेन कमेटी, शास्त्री कमेटी और अपीली अधिकरण के विचाराधीन विवाद में एक पार्टी थे। अब, महोदय, शास़्त्री अवार्ड के अनुसार, इनमें से प्रत्येक बैंक में, जमाराशि के रूप में 50 करोड़ रुपये थे, जो इस देश में जमाकर्ताओं से एकत्र की गई थी। यह सर्वविदित है कि ये विदेशी अथवा एक्सचेंज बैंक मुख्यतः निवेशकों अथवा विदेशी वाणिज्य को समर्थन देने में लगे रहते हैं।
मेरे विचार में, वे देशी उद्योग अथवा देशी व्यापार में कोई सहायता नहीं देते। यह तो एक बात है, दूसरी बात यह है कि, विदेशों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को आमंत्रित करते हैं। और जिन भारतीय जनों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं, उनको सबसे निचले स्तर पर रखते हैं। वे, जिन यूरोपीय लोगों को नियुक्त करते हैं, उनको काफी अधिक वेतन देते हैं। निश्चय ही, मैं पूछना चाहूँगा कि क्या भारतीय बैंकों व विदेशी बैंकों के बीच अंतर रखना उचित नहीं है, जिससे इन विदेशी बैंकों से भारतीय लोग भी कुछ लाभ उठा सकें जो सब विदेशी कर्मचारी ले रहे हैं। महोदय, मैं बोल चुका हूँ।
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