50. अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयुक्त, 1953 का प्रतिवेदन - Page 377

360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में प्रयोग के तौर पर चलाया गया था और अब उस योजना को पांच वर्षों के लिए स्थायी कर दिया गया है।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप उसे पुनर्जीवित कर रहे हैं क्योंकि आपने उसकी गलती को समझा है।

डॉ. के. एन. काटजू : उसे पुनः चालू किया गया है और अब छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अनेक वर्षों के बाद।

डॉ. के. एन. काटजू : मेरा उस बात से संबंध नहीं है।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आपको अपने विभाग का इतिहास पढ़ना चाहिए। आप केवल इतना नहीं कह सकते कि ‘‘मैं नहीं जानता’’। मैं यह कह रहा था कि मेरे माननीय मित्र ने जो कुछ भी कहा है, मेरी आलोचना सही है और वह मूल मत है। इस दिशा में दो कौम हैं-एक शासन करने वाली कौम है और दूसरी, जिस पर शासन किया जा रहा है। एक माननीय सदस्य : प्रश्न क्या है?

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : पिछड़ी जातियाँ, सब प्रजा के लोग हैं। किसी भी स्थान पर उनका कोई अधिकार नहीं है। कुछ भी नहीं है। प्रशासन में उनका कोई स्थान नहीं है। वे किसी कार्यपालिका पद पर नहीं हैं। कार्यपालिका और प्रशासन पर उच्च वर्गों का एकाधिकार है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि उनको ऊंची शिक्षा मिलती है। भारत सरकार में भी विभागों के बारे में छानबीन क्यों नहीं की जाती। सरकार के प्रत्येक सचिव का पुत्र या पुत्री केम्ब्रिज या ऑक्सफोर्ड में पढ़ते पाए जाएंगे, उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए दो-दो या तीन-तीन बार चक्कर लगाए हैं। क्योंकि उनके पास प्रचुर साधन उपलब्ध हैं। पिछड़ी जाति के व्यक्ति का बेटा प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने में भी असमर्थ रहता है। शताब्दियों से इस प्रकार भिन्न-भिन्न दो वर्गों के आधार पर यह व्यवस्था चल रही है-यह असहनीय बात है क्योंकि सदा के लिए एक ही वर्ग द्वारा शासन चलाए जाने की व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कुछ समय के लिए वे ऐसा कर सकते हैं। परंतु उनको सोचना चाहिए कि अन्य वर्गों को भी शैक्षिक अर्हता प्राप्त होनी चाहिए ताकि वे भी शासन की बागडोर संभाल सकें। हम हमेशा के लिए शासित वर्ग नहीं रह सकते।

श्री एच. पी. सक्सेना (उत्तर प्रदेश) : भारत में वर्गों की कोई व्यवस्था नहीं है। यह

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वर्गविहीन देश है।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसलिए मैं कहता हूँ कि यदि आप देश में एकता चाहते हैं, सबको एक स्तर पर लाना चाहते हैं तो यह ठीक नहीं है कि आप सबसे ऊंची शिक्षा