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प्राप्त करें और दूसरों को न्यूनतम शिक्षा मिले या वह भी न मिले। आपको इस विचार से विदेश में शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। मैंने इस उद्देश्य को सामने रखकर भारत सरकार से कुछ कोटा लेने कि लिए संघर्ष किया था और उनसे कहा था कि वे विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा की जिम्मेदारी प्रांतों पर डालें। राज्य वह जिम्मेदारी आप पर डाल कर बहुत प्रसन्न है। वे क्या करते हैं? उन्होंने नशाबंदी चालू कर रखी है और वे लोगों को गंभीर बनाते हैं। मेरा निजी विचार यह है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर है परंतु किसी बात से अनभिज्ञ है तो वह उस व्यक्ति से बेहतर नहीं है जो शिक्षित है और थोड़ी-सी पी लेता है। मैं बाद वाले व्यक्ति को तरजीह दूंगा। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि मेरे माननीय मित्र अनुसूचित जातियों के लड़कों को विदेश भेजने संबंधी व्यवस्था को पुनः बहाल कर रहे हैं। मैं उन्हें बधाई देता हूँ।
अब, महोदय, हाल ही में एक दूसरी बात मेरी जानकारी में आई है कि शिक्षा विभाग ने एक परिपत्र जारी किया है-एक या दो महीने पहले-कि अनुसूचित जाति के उन्हीं लड़कों को छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिन्होंने परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं अन्य लड़कों को नहीं मिलेगी। मुझे इस बात पर हैरानगी है कि इतने उदार हृदय वाली सरकार, जिसके मन में सहानुभूति और इच्छा है कि अनुसूचित जातियों का स्तर ऊंचा हो, वह इतनी कठोर शर्त रख सकती है कि वे 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करें। आपको उन परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए जिनमें अनुसूचित जाति का लड़का रहता है। शायद उसके पिता अथवा माता के पास उसकी पढ़ाई के लिए अलग से कोई कमरा भी है या नहीं, संभवतः रात के समय पढ़ने के लिए उसके पास लैम्प भी है या नहीं। वह एक जन-समूह में रहता है। उस छात्र से परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक लेने की आशा कैसे की जा सकती है? क्या यह बेहूदा बात नहीं है। आप कुछ समय तक साधारण स्तर रहने दीजिए अर्थात् 33 प्रतिशत अंक जो सभी विश्वविद्यालयों द्वारा मान्यताप्राप्त हैं और जो आपके द्वारा भी भारत सरकार में रोजगार देने के प्रयोजन के लिये मान्यता प्राप्त हैं। यदि कोई लड़का केवल परीक्षा पास करके भारत सरकार में नियुक्त किया जा सकता है तो वह ऊँची शिक्षा प्राप्त करने के लिये छात्रवृत्ति पाने के लिए पात्र क्यों नहीं है? यदि आप उसकी प्रगति में जानबूझकर बाधा डालना चाहते हैं तो वह अलग बात है। कठिनाई यह है। जून के अंतिम सप्ताह में, किसी समय प्रवेश का काम शुरू होता है। विभिन्न कॉलेज बिना फीस मांगे अनुसूचित जातियों के छात्रों को प्रवेश दे देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि भारत सरकार उन्हें छात्रवृत्ति दे देगी। कॉलेज में प्रवेश के तीन महीने बाद मंत्रालय एक परिपत्र जारी कर देता है कि छात्रवृत्ति केवल उन्हीं छात्रों को दी जाएगी जिन्होंने परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए होंगे। ऐसी स्थिति में कॉलेज उन लड़कों का क्या करे जिनको उन्होंने इस विश्वास पर प्रवेश दे दिया था कि पहले वाली व्यवस्था प्रभावी रहेगी। वे लड़के भी क्या करेंगे, जिन्होंने कॉलेजों में प्रवेश पा लिया है? मुझे