362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आशा है कि मेरे माननीय मित्र गृह मंत्री इस विषय पर विचार करेंगे और शिक्षा मंत्री से बातचीत करेंगे और उनसे कहेंगे कि वह कम से कम इस वर्ष के लिए इस कठिनाई का कोई समाधान निकालें। आप आगामी वर्ष जो चाहें करें बशर्तें कि आप छात्रों को व कॉलेजों को काफी पहले अपने प्रस्ताव से अवगत करा दें।
इसके बाद मैं सेवाओं के विषय में कुछ कहना चाहूँगा। आयुक्त ने सेवाओं के संबंध में अपने आंकड़े तीन ग्रुपों में- सेना, अखिल भारतीय सेवा और भारत सरकार की केंद्रीय सेवा- में विभक्त कर दिए हैं। मैंने देखा है कि सेना के मामले में कुछ वर्गों में स्थिति और बिगड़ी है। वर्ष 1952 में अनुसूचित जाति के 2 सेकंड लेफ्टिनेन्ट थे। वर्ष 1953 में एक भी नहीं था। वर्ष 1952 में जूनियर कमीशन ऑफिसरों की संख्या 601 थी, वर्ष 1953 में उनकी संख्या 435 थी। वर्ष 1952 में गैर कमीशन ऑफिसरों की संख्या 3,273 थी, वर्ष 1953 में उनकी संख्या घट कर 2,533 रह गई। वर्ष 1952 में अन्य पदों में उनकी संख्या 22,288 थी और वर्ष 1953 में यह घटकर 18,666 रह गई। सेना में अनुसूचित जातियों की स्थिति खराब होने के क्या कारण हो सकते हैं, यह मेरी समझ में नहीं आया। मेरे विचार में, सेना एक ऐसा विभाग है जहाँ अधिक प्रतिभावान होना आवश्यक नहीं है, मेरा आशय अन्य पदों से है। ऊंचे वर्गों के स्टाफ के लिए ऐसा आवश्यक हो सकता है-बहुत अधिक प्रतिभावान व्यक्ति। परन्तु मैं उनके बारे में नहीं कह रहा हूँ। हम देखते हैं कि अन्य पदों (अदर रैंक्स) में भी उनकी संख्या 22,000 से घटकर 18,000 रह गई है। इसके क्या कारण हैं? जहाँ तक मैं समझता हूँ सेना में वृद्धि हो रही है और सेना के प्रसार को देखते हुए स्वभावतः यह आशा की जाती है कि सेना में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या में वृद्धि होगी। अन्य सभी स्थानों पर आप उन्हें अनुपयुक्त बताते हैं। यह बड़ी दुरूह शब्दावली है। सभी लोक सेवा आयोगों और नियुक्ति करने वाले प्राधिकारियों ने यह शब्दोक्ति याद कर रखी है। आप बड़ी सरलता से कह देते हैं कि अमुक व्यक्ति अनुपयुक्त है और बात समाप्त हो जाती है, परंतु सेवा में अनुपयुक्त करार दिये जाने का क्या कारण है? सेना मे आपने व्यक्ति की छाती का माप निर्धारित किया हुआ है। अनुसूचित जातियों में ऐसे बहुत कम लोग होंगे जो इस शर्त को पूरा न करते हों। फिर आपने व्यक्ति की ऊंचाई का मापदंड निर्धारित कर रखा है-लगभग 5 फुट 4 इंच। मेरे विचार में अनुसूचित जाति के सभी उम्मीदवारों की इतनी ऊँचाई होगी (व्यवधान)। संभव है कि कुछ उम्मीदवार इस मापदंड पर खरे न उतरें, मैं मानता हूँ। परंतु यदि वे स्वास्थ्य, छाती के नाप और कद की ऊँचाई के मापदंड के अनुसार सही पाये जाते हैं तो मेरे विचार में अनुसूचित जाति का प्रत्येक व्यक्ति सेना की सेवा के लिये उपयुक्त समझा जाना चाहिए। जब आप उनको भारत सरकार के अन्य विभागों में नियुक्त करने से मना करते हो तो सेना और पुलिस जैसे विभागों में, जहाँ शिक्षा के स्तर का इतना अधिक महत्व नहीं है, उनको कुछ रियायत अवश्य