50. अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयुक्त, 1953 का प्रतिवेदन - Page 380

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दी जानी चाहिए। परंतु, आप वहाँ भी उनके साथ सौतेला व्यवहार करते हैं। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि गृह विभाग इन आंकड़ों पर कभी ध्यान देता है या नहीं। निश्चय ही सरकार को कमांडर-इन-चीफ से पूछना चाहिए कि इन की संख्या में इतनी कमी क्यों हुई है।

तत्पश्चात्, महोदय, मैं अखिल भारतीय सेवाओं पर आता हूँ। इस संबंध में प्रशासनिक सेवा व भारतीय पुलिस सेवा का उल्लेख किया जाता है। मेरे विचार में इनके लिए भर्ती वर्ष 1952 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से आरंभ हुई थी। मेरे माननीय श्री दातार, यदि मैं कुछ गलत हूँ तो उसमें सुधार कर सकते हैं। परन्तु मेरे विचार में यह वर्ष था....

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, मैं उनकी गिनती नहीं कर रहा हूँ जिनको प्रांतों से भर्ती किया गया था। एक या दो को छोड़कर अनुसूचित जाति के किसी भी व्यक्ति को भर्ती नहीं किया गया था, शेष सबको अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया था यद्यपि प्रान्तीय सरकारें उनको पूरी तरह उपयुक्त समझती थीं। केन्द्रीय लोक सेवा आयोग ने उनको बिल्कुल अनुपयुक्त पाया। यह तो इसका प्राचीन इतिहास है, अब हमें वर्तमान स्थिति पर विचार करना है। क्या वर्ष 1952 से लेकर जबसे नया संविधान लागू हुआ है भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए कोई भर्ती की गई है? मैंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए लोक सेवा आयोग द्वारा अनुसूचित जाति का एक भी व्यक्ति नियुक्त किया गया नहीं देखा है। मैंने भारतीय पुलिस सेवा के लिये भी लोक सेवा आयोग द्वारा अनुसूचित जाति का एक भी व्यक्ति नियुक्त किया गया नहीं देखा है। केवल गत वर्ष, मैंने लोक सेवा आयोग से संघर्ष किया था और उनको भारतीय पुलिस सेवा के लिए एक व्यक्ति को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया था। क्या गृह विभाग, जो सेवाओं का प्रभारी है, इस विषय को कोई महत्व नहीं देता अथवा इसको बहुत अधिक महत्व देता है? ये दो कार्यपालक सेवाएं हैं, मेरे माननीय मित्र बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि कार्यपालक सेवा और प्रशासनिक सेवा के बीच क्या अंतर है। प्रशासनिक सेवा प्रायः लिपिक सेवा है। कार्यपालक सेवा में दिशा दिखाने की शक्ति होती है। अब मैं बिल्कुल निडर होकर कहना चाहता हूँ कि कार्यपालक पद पर बैठे एक अधिकारी की तुलना में 200 लिपिकों की कोई शक्ति नहीं है। हिंदी में हम कहते है ‘मारने जगह’ ये बेचारे क्लर्क क्या हैं? आप सैनिक दुर्ग (गढ़ी) देखेंगे लेकिन उत्तर प्रदेश में कोई गढ़ी नहीं है- देश के हमारे भाग में स्थान-स्थान पर मराठा गढि़या मिलेंगी।

श्री बी. एन. दातार : हम इसे ‘मार किला’ कहते हैं।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आदमी वहाँ बैठकर फायर कर सकता है दुश्मन को।