35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 38

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माननीय उपाध्यक्ष : मुझे यह जानकारी दी गई थी कि माननीय श्री वाजे़द अली स्वयं सदस्य थे और वे बोलने के लिए अवसर चाहते थे।

डॉ. अम्बेडकर : यदि वे बोलते हैं तो मैं नहीं बोलूंगा। किंतु वे एक दिन मेरे पास आए थे- मुझे दिन याद नहीं- और उन्होंने मुझसे पूछा था कि क्या वह निरर्हित हैं। मेरे विचार में वह मेरी इस बात से सहमत होंगे कि मैंने उन्हें बताया था कि वह निरर्हित हैं, वह मेरा मत था और यह कि कोई भी संसद-सदस्य, जो किसी भी प्रांत में सरकारी अधिवक्ता है, निरर्हित है। मैंने उन्हें यह बता दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें बहुत खेद है और यह कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। इस पर मैंने कहा कि माफी के लिए उपबंध हो सकता है आदि-आदि और मैंने बताया था कि ‘‘आप उचित प्राधिकारी को अपना अभ्यावेदन दें तो अच्छा होगा,’’ मैं समझता हूँ कि उन्होंने मामले में अध्यक्ष को अभ्यावेदन दिया था और अध्यक्ष महोदय ने मामला मेरे पास भेजकर यह कहा था कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि सदस्य ने निश्चित रूप से यह कहा है कि उसे इस विनिर्णय की जानकारी नहीं थी और वे उस पद को धारण किए रहे और सरकार उनके मामले पर भी संरक्षण के लिए विचार कर सकती है।

उसी आधार पर हमने उनके मामले को सम्मिलित किया था। मुझे बस इतना ही कहना है।

श्री कॉनथ : कोयला जाँच समिति संविधान के प्रवृत्त होने के पश्चात्, मार्च 1950 के बाद गठित की गई थी। निरर्हता के इस पहलू पर समिति गठित किए जाते समय क्यों विचार नहीं किया गया था?

डॉ. अम्बेडकर : श्री कॉमथ, ये बहुत अच्छे और बहुत उत्तम बिंदु हैं, किन्तु जैसा मैं महसूस करता हूँ सरकार अनुच्छेद 102 को लागू करने में बहुत सावधान या सतर्क नहीं थी क्योंकि हम तदर्थ आधार पर कार्य कर रहे थे। संपूर्ण परेशानी इस तथ्य से उत्पन्न हुई थी कि जहाँ तक संविधान सभा का संबंध था, हमने इस नियम को निराकृत कर दिया था और हमने संविधान सभा को भी विधायिका के रूप में कार्य करने के लिए अनुज्ञात कर दिया था। इसमें कुछ हद तक उलझन और भ्रांति थी और परिणामस्वरूप सरकार का ध्यान इस विशिष्ट प्रतिपादना की ओर आकर्षित नहीं किया गया था किंतु जब मामला उनके ध्यान में लाया गया तो उन्होंने सोचा कि वह यही सर्वोŸाम काम परिस्थितियों में कर सकते थे और मुझे आशा है सदन इस विधेयक को अपना समर्थन देगा।

डॉ. पट्टाभि (मद्रास) : मैं सदन का ध्यान मद्रास सरकार द्वारा इस प्रश्न की बाबत लिए गए उस रोचक मत की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि क्या विधायी