35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 39

22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निर्वाचनों के प्रयोजनार्थ लोक अभियोजक या सरकारी अभिवक्ता सरकारी सेवक है या नहीं। जहाँ तक विधानमंडल के निर्वाचन का संबंध है, नैलोर के लोक अभियोजक श्री याहिया अली को लोक सेवक समझा गया था और अपनाई गई रीति इस प्रकार थी। उन्हें विधानसभा का सदस्य होने के कारण लोक अभियोजक के पद से त्यागपत्र देना पड़ा था ताकि वह विधानसभा का चुनाव लड़ सकें और उसके बाद उन्हें सरकार द्वारा लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था। उन्होंने ऐसा तीन या चार बार किया है और अंततः उन्हें उच्च न्यायालय की पीठ में स्थानांतरित करके उनकी परेशानी समाप्त हुई थी।

श्री श्यामनंदन सहाय : महोदय, क्या मैं एक जानकारी दे सकता हूँ? आपने

“;keua nu

भाग (घ) में 1951 तक रेल स्थानीय सलाहकार समितियों के सदस्यों के पदों को सम्मिलित किया है। संभवतः आप इसे 1952 करने के लिए संशोधन प्रस्तावित करेंगे। मेरी कठिनाई यह है, क्या आप वर्षानुवर्ष ऐसे प्रस्ताव लाएंगे ताकि हर वर्ष 1952, 1953 और 1954 सम्मिलित किए जा सकें अथवा क्या आप यह अधिकथित करेंगे कि रेल स्थानीय सलाहकार समितियों की सदस्यता से निरर्हता नहीं होगी।

अब दूसरा मुद्दा है यदि इन विभिन्न समितियों को इस विधेयक में निश्चित रूप से अधिकथित कर दिया गया तो क्या इससे वास्तव में राष्ट्रपति उलझन में नहीं पड़ जाएंगे। अब उसे कठिनाई महसूस होगी, क्योंकि संसद ने केवल कुछ समितियों का उल्लेख किया है। जिसका अर्थ लाभ के पदों के रूप में नहीं होगा। यदि कोई मामला उनके पास भेजा जाता है तो उन्हें कठिनाई हो सकती है और उन्हें संसद बुलानी पड़ सकती है। भले ही मामला न्याटय हो और विनिश्चित करने की उनकी सक्षमता के भीतर हो।

डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि मेरे माननीय मित्र को राष्ट्रपति के बारे

vEcsM dj

में चिंता करने की जरूरत है। हम उनका उपयोग विभिन्न बातों के लिए करते हैं और हमारे पास अनुच्छेद 392 है जिसके द्वारा वह आदेश जारी कर सकते हैं और संक्रमण स्थिति के बावजूद हम उनका लाभ उठाना नहीं चाहते।

माननीय उपाध्यक्ष : इस चर्चा के बाद हम एक अन्य चर्चा प्रारंभ कर रहे हैं। मैं सदन

;{k

में प्रस्ताव रखूंगा। अन्य खंड हैं और माननीय सदस्यों के पास पर्याप्त अवसर है।

प्रश्न यह है :

‘‘कि कतिपय लाभ के पदों के बारे में यह घोषित करने के लिए कि उनके धारण करने वाले संसद सदस्य होने के कारण निरर्हित नहीं होंगे, विधेयक पर विचार किया जाए।’’