364 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ये कार्यपालक पद ऐसे पद हैं जहाँ से दिशा निर्देशन किया जा सकता है। लिपिकों को सब प्रकार का प्रशिक्षण चाहिए। कोई भी अधिकारी उनकी चरित्र पंजी (केरेक्टर रोल) में कोई अनुचित शब्द लिखकर या यह लिखकर कि यह व्यक्ति किसी काम का नहीं उसे खराब कर सकता है। उसके संरक्षण का केवल एक ही तरीका है कि कार्यपालक सेवा में उसका कोई व्यक्ति है, जो यह सुनिश्चित करें कि उसके साथ कोई अन्याय न हो। इसी प्रकार, सरकार द्वारा निर्धारित नीति के बारे में कि क्या वह नीति सफल होगी और उसके वांछित परिणाम निकलेंगे, उन लोगों पर निर्भर करता है जिन पर उस नीति को कार्यान्वित करने का उत्तरदायित्व है। यदि कार्यपालक अधिकारी किसी नीति को भली-भांति लागू नहीं करना चाहते या वे उसका विरोध करते हैं तो चाहे नीति कितनी भी अच्छी क्यों न हो, वह सफल नहीं होगी। मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि जहाँ तक मेरा अनुभव है, समूचा प्रशासन, जिसमें केवल सवर्ण हिंदू ही हैं, सब से अधिक सहानुभूतिहीन प्रशासन है और इसीलिए अनुसूचित जातियों को कष्ट सहने पड़ रहे हैं। जब हम सेवाओं में प्रतिनिधित्व पर बल देते हैं तो इसे संप्रदायवाद का नाम देकर बदनाम किया जाता है। हम तो अन्य लोगों के संप्रदायवाद को कम करने का प्रयत्न करते हैं। हम सम्प्रदायवाद के पक्ष में नहीं हैं। मेरे माननीय मित्र को यह बात याद रखनी चाहिए। जब तक आपका प्रशासन और आपके कार्यपालक अधिकारी अनुसूचित जातियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया नहीं अपनाते तब तक आपका कोई कानून और कोई प्रशासनिक नीति लाभप्रद सिद्ध नहीं होगी।
इसके बाद मैं केंद्रीय सेवाओं के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ। यहाँ पर मैं 1 दिसम्बर, 1952 की स्थिति के अनुसार केवल स्थायी पदों के आंकड़े ले रहा हूँ अस्थायी पदों के नहीं। आयुक्त का कहना है कि रेल मंत्रालय, संचार मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सूचना मंत्रालय और उसके अधीन अन्य संगठनों ने इसके संबंध में आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसलिए ये आंकड़े केवल उन्हीं विभागों के हैं जिन्होंने सूचना दी है। आंकड़े बहुत प्रभावोत्पादक हैं। वर्ग I में वास्तविक संख्या 752 है और उनमें अनुसूचित जातियों की संख्या 10 है; गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित अनुपात के अनुसार वह संख्या 175 होनी चाहिए। वर्ग II (राजपत्रित पद) में कुल संख्या 642 है जबकि इनमें अनुसूचित जातियों की संख्या सात है; अनुपात की दृष्टि से यह संख्या 107 होनी चाहिए। वर्ग I (अराजपत्रित) कुल संख्या 1123 है और उनमें अनुसूचित जातियों की संख्या 44 है जो 185 होनी चाहिए, वर्ग श्रेणी III में कुल संख्या 10,372 है, उनमें अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 536 है और यह संख्या 728 होनी चाहिए। वर्ग IV में, कुल संख्या 8807 है।
डॉ. पी. सी. मित्रा (बिहार) : उनमें से कितने लोगों ने आवेदन-पत्र भेजे थे?
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 1251 है जबकि उनकी