50. अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयुक्त, 1953 का प्रतिवेदन - Page 384

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पर क्यों छोड़ा जा रहा है। इस देश में सामाजिक कार्यकर्ता पेशेवर होता है, उसके अंदर सहानुसभूति नाम की कोई वस्तु नहीं होती। वह पेशेवर व्यक्ति होता है। यदि मुस्लिम लीग उसकी मांग करे तो वह संभवतः मुस्लिम लीग का काम करेगा और यदि हिंदू महासभा उसकी मांग करे तो वह हिंदू महासभा का काम करेगा; यदि काँग्रेस उसकी मांग करे तो वह कांग्रेस का काम करेगा। वह पेशेवर होता है उसके भीतर प्रेम नाम की वस्तु नहीं होती जैसा कि टॉलस्टाय ने कहा है-ठीक ही कहा है- सेवा करने से पूर्व आपको प्यार करना सीखना होगा जब तक कोई व्यक्ति किसी के साथ प्यार नहीं करता, उसकी सेवा नहीं कर सकता। इन पेशेवर लोगों का किसी के साथ प्यार नहीं होता; वे केवल अपनी जीविका कमाने का प्रयास करते हैं और इसलिए शायद मुझे इसमें कोई हैरानी नहीं होगी यदि वे सभी तीनों प्रकार की संस्थाओं से परिलब्धियाँ प्राप्त कर रहे हों। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। यदि मेरे मित्र कुछ कहना चाहते हैं तो उचित तरीका यह होगा कि वह बेरोजगार स्नातकों को यह काम करने के लिये लगाएं। वे काफी संख्या में मिल जाएंगे, जो प्रतिभावान शिक्षित लड़के होंगे और जीवन के प्रति उनका कुछ आधुनिक दृष्टिकोण भी होगा और वह संभवतः इस विषय में सद्विवेक से काम ले सकेंगे। आप उनको उचित वेतन पर नियुक्त करें, उन्हें साइकिल या मोटर साइकिल दीजिए और प्रत्येक व्यक्ति को सात, दस या पंद्रह गांव सौंपिए और उनसे कहिए कि वे प्रत्येक गांव में जाएं, सार्वजनिक सभाएं करें, अस्पृश्यता के बारे में जनता को शिक्षित करें और उनको बताएं कि आधुनिक समय में इस बात से इस देश का अपमान होता है। यह तरीका अपनाने से इसके अच्छे परिणाम निकलेंगे और यह किसी भी अन्य तरीके से अधिक प्रभावीत भी होगा, जो मेरे मित्र अपनाना चाहते हैं। ये सामाजिक काँग्रेस सरकार का काम करने में क्यों रुचि लेंगे, यह मेरी समझ के बाहर है। अतीत काल में, ब्रिटिश सरकार के समय केंद्रीय सरकार कलेक्टर के माध्यम से प्रशासनिक कार्य करती थी। उसको धन दिया जाता था उसको कुछ क्षेत्रों मे कुछ करने के लिए कह दिया जाता था। वह सरकार को जवाबदेह होता था। उसके हाथों में धन सुरक्षित होता था। यदि आप कलेक्टर नियुक्त नहीं करना चाहते तो कोई ऐजेंसी बना दीजिए जैसे कि मैंने सुझाव दिया है, कुछ प्रतिभावान लड़कों का एक ग्रुप बना दीजिए, वे इस सेवा को भली-भांति अंजाम देंगे। इस प्रकार की व्यवस्था का, जिसमें विभिन्न विचारों के लोग होंगे, उसका कुछ भी नाम रखा जाए, कोई परिणाम निकलने वाला नहीं है।

फिर, महोदय..................

श्री के. बी. लाल (बिहार) : क्या वे पेशेवर लोग नहीं होंगे?

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सरकारी कर्मचारी पेशेवर नहीं होता। क्यों? बाद में आप