368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उनका उपयोग चुनावों में अपने पक्ष में मत हासिल करने के लिए करना चाहते हैं। सारी समस्या तो यही है। अब महोदय, यह बात इस प्रचार कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा कुछ एजेंसियों का चयन और उनको धन दिये जाने के बारे में है। आयुक्त ने इस संबंध में मेरे गृह विभाग के बीच हुए पत्राचार पर कुछ टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने कहा है कि अन्य एजेंसियों ने धन प्राप्त करने और प्रचार करने के लिए सरकार की पेशकश को स्वीकार कर लिया है। मैं ही दुविधा में था, मैंने इन्कार कर दिया था और आयुक्त ने सोचा कि मैंने जो गलती की है, उसको जनता के सामने रखना अच्छा होगा। अच्छा होता, यदि वह उनको वह पूरा पत्र देते जो मैंने गृह विभाग में लिखा था। मेरे विचार में, श्री दातार ने ही इस मामले की छानबीन की होगी, यदि मैं गलती पर नहीं हूँ और उनको याद होगा कि मैंने कहा था कि भारत सरकार ने जिन निकायों का चयन किया है वे राजनीतिक दल हैं, जैसे हरिजन लीग और कोई अन्य लीग, वे सब राजनीतिक निकाय हैं। फेडरेशन (संघ) भी राजनीतिक हैं। इसलिए मेरे विचार में राजनीतिक निकायों को सरकारी धन उपलब्ध कराना गलत होगा जो राजनीतिक प्रचार के लिए धन का उपयोग कर सकते हैं, अनुसूचित जातियों की बेहतरी के लिये नहीं और मैंने उनको बताया था कि एक अन्य निकाय, जो बम्बई में बन रहा है और जो विशुद्ध समाज कल्याण का निकाय है, के एक चेयरमैन हैं। इनके पास दो या तीन लाख रुपये की बड़ी धनराशि उपलब्ध है। वे एक हाल बना रहे हैं जहाँ से वे अपने कार्यकलाप चलायेंगे। निःसंदेह उसमें मैं यह लिखना भूल गया कि वह निकाय, यद्यपि वह बम्बई में बनाया गया है, उसका सामाजिक कार्य बम्बई शहर अथवा बम्बई राज्य तक सीमित नहीं है। वे देश के किसी भी भाग में किसी प्रकार का सामाजिक कार्य कर सकते हैं। केवल उनका केंद्र तथा मुख्य कार्यालय बंबई में रहेगा। श्री दातार ने मेरे सुझाव को ठुकरा दिया और उसका उल्लेख प्रतिवेदन में कर दिया। मुझे केवल यही कहना था। यदि श्री दातार मुझे लिखते कि उन्होंने मेरा सुझाव स्वीकार नहीं किया है तो मुझे अपने पर विश्वास है कि मैं अपना मन बदल लेता और फेडरेशन के नाम से पेशकश को स्वीकार कर लेता, क्योंकि याचक को जो कुछ मिले, उसे ले लेना चाहिए और मैं अब भी कहता हूँ कि यदि वह दोबारा कहें कि फ़ेडरेश ही एक ऐसा निकाय है जिसको भारत सरकार धनराशि देगी तो मुझे इसमें कोई संकोच नहीं होगा। लेकिन मेरा अब भी अपना विचार यही है कि यह काम राजनीतिक निकायों को नहीं सौंपा जाना चाहिए।
अब महोदय, मैं अनुसूचित जातियों के आर्थिक उद्धार के प्रश्न पर आता हूँ। शिक्षा और सेवाओं के साथ-साथ अनुसूचित जातियों का दर्जा ऊँचा करने के लिए यह भी बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। अनुसूचित जातियों का आर्थिक दर्जा बढ़ाने के साधन क्या हैं? स्पष्ट है अनुसूचित जातियों का आर्थिक उद्धार उन अवसरों पर निर्भर करेगा जो नको मिलेंगे जिसको लाभप्रद व्यवसायों में लगाया जाना कहा जा सकता