50. अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयुक्त, 1953 का प्रतिवेदन - Page 386

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है। जब तक उनको लाभप्रद व्यवसायों में स्थान नहीं दिया जाएगा, उनका आर्थिक उद्धार नहीं हो सकता। वे दास ही बने रहेंगे, यदि नहीं तो गांवों में जमींदारों के

खेतिहर श्रमिक बने रहेंगे। इस संबंध में किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है। इन लाभप्रद व्यवसायों में से मेरे विचार में सरकार को जिस सबसे अधिक महत्वपूर्ण पहलू पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए वह है अनुसूचित जाति के लोगों को भूमि का दिया जाना। उनको भूमि पर बसा देना चाहिए जिससे उनको आजीविका का स्वतंत्र साधन उपलब्ध हो सके, उनका किसी भी व्यक्ति से भय समाप्त हो जाए, वह अपना सिर सीधा रखकर चल सकें, निर्भीकता और हिम्मत से जी सकें। मेरे विचार में, इस मुद्दे पर सभी मंत्री सहमत होंगे। सरकार को अनुसूचित जातियों के लोगों को भूमि अवश्य उपलब्ध करानी चाहिए, अब पहला प्रश्न यह है कि क्या अनुसूचित जातियों के लोगों को भूमि देने के लिए भूमि उपलब्ध है? क्या जिनके पास इस समय भूमि है उनसे कुछ भूमि अलग करवाने की शक्ति सरकार के पास है और क्या सरकार को उनसे भूमि लेकर अनुसूचित जातियों के लोगों को देने का अधिकार है? यदि भूमि को खरीदा जाना है तो क्या सरकार द्वारा भूमि खरीदने के लिए अनुसूचित जातियों को धनराशि दिये जाने की संभावना है? अनुसूचित जाति के लोगों को भूमि दिये जाने के तीन तरीके हैं। जिन लोगों के पास भूमि है, सरकार उनकी जोत की सीमा निर्धारित करे और उस सीमा से अधिक भूमि उनसे छीन ले तथा अनुसूचित जाति के लोगों को दे दे। दूसरे, यदि कोई भूमि बेची जानी हो तो उसको खरीदने के लिए सरकार धनराशि उपलब्ध कराए।

महोदय, यह बात प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि भारत में भूमि जोत आर्थिक दृष्टि से आजीविका का साधन ही नहीं, इसका समाज में स्तर से भी संबंध है। जिस व्यक्ति के पास भूमि है उसका स्तर उस व्यक्ति से ऊंचा है जिसके पास भूमि नहीं है। अब यह स्पष्ट है कि गांवों में आर्थिक दर्जे का सबसे अधिक महत्व है। कोई भी हिंदू यह नहीं चाहता कि किसी अस्पृश्य व्यक्ति के पास भूमि हो जिससे वह कहीं ऐसा न हो कि सामाजिक प्रथा के अधीन निर्धारित अपने समुदाय के दर्जे से ऊँचे दर्जे पर पहुंच जाए। महोदय, गांव में अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति को थोड़ी सी भी भूमि मिलना मुझे असंभव लगता है। मैं कह नहीं सकता कि सरकार जोत की सीमा निर्धारित करने हेतु कहाँ तक कानून बना पाएगी। क्रांति हो सकती है। यदि सरकार, भूमि संबंधी विधान पास करते समय, संपत्ति को किसानों के नाम करने के लिए बनाये कि वह भूमि के सर्वोपरि स्वामी के रूप में भूमि को अपने नाम रखें, तब वे कानून बना सकते हैं कि चूंकि भूमि सरकार की है इसलिए कोई भी व्यक्ति कुछ निर्धारित एकड़ भूमि से अधिक भूमि नहीं रख सकेगा। परंतु सरकार ने इन किसानों को मालिक बनाकर सबसे बड़ी गलती की है। महोदय, एक बार टेलीरैंड ने नेपोलियन से कहा था, ‘‘आप यूरोप के साथ यह झंझट क्यों करना चाहते हैं? आप यह शत्रुता