50. अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयुक्त, 1953 का प्रतिवेदन - Page 387

370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्यों पैदा कर रहे हैं? आप फ्रांस के बादशाह बनकर और मुझे अपना प्रधान बनाकर संतुष्ट क्यों नहीं हो जाना चाहते? नेपोलियन के महल के बाहर कुछ सैनिक खड़े थे जिनके हाथों में बंदूक थी और जिनके आगे धूप में चमचमाती संगीनें लगी हुई थी। नेपोलियन को गाली देने की आदत थी। वह टेलीरैंड से बोला ‘‘आप कितने बहुमूल्य रेशमी वस्त्र पहने हैं, आप मेरी बटालियन को देखते हैं?’’ उसने कहा, ‘‘मैं उनको देख रहा हूँ’’ फिर नेपोलियन ने पूछा, ‘‘मुझे शहंशाह क्यों नहीं बनना चाहिए?’’ टेलीरैंड ने उसका उत्तर दिया और मित्र उस उत्तर को याद रखेंगे ‘‘आप इन संगीनों पर बैठ नहीं सकते, और सब कुछ कर सकते हैं।’’ अब आपने इन किसानों को मालिक बना दिया है। अब आप उन पर नियंत्रण नहीं रख सकते, वे आप पर नियंत्रण रख सकते हैं। आप बड़े गलत तरीके से गोल-माल करते रहे हैं, अनेक लोगों के परामर्श की परवाह न कर आप गोल-माल करते रहे हैं। परंतु आपने चुनाव जीतने के उद्देश्य से यह सब कुछ किया और अब उसका नतीजा आपको भुगतना पड़ रहा है, फिर भी, जोत सीमा लागू करना कोई असंभव काम नहीं है।

मेरे माननीय मित्र, श्री गोविंद वल्लभ पंत द्वारा नियुक्त संयुक्त प्रांत काश्तकारी समिति के प्रतिवेदन का अध्ययन मैंने किया है। मैंने उसकी एक-एक पंक्ति को पढ़ा है और मुझे इस बात की आशंका है कि क्या इसके तथ्यों के बारे में उन लोगों को कुछ भी जानकारी है जो जोत सीमा लागू करने के बारे में बहुत शोर मचाते थे। उत्तर प्रदेश में औसत जोत कितनी है? कम से कम एक एकड़ और अधिक से अधिक लगभग चार या पांच एकड़। वहाँ पर यही स्थिति है और इस से आगे सच बात यह है कि उत्तर प्रदेश में प्रत्येक इंच भूमि पर खेती की जाती है और वह किसी न किसी के कब्ज़े में है। आप वहाँ कुछ नहीं कर सकते और मुझे विश्वास है कि दूसरे अधिकांश राज्यों में भी यही स्थिति है। इसलिए गृह मंत्री से मेरा निवेदन है कि आप अनुसूचित जातियों को यह कहकर कब तक बेवकूफ बनाते रहेंगे, ‘‘ओह, आप शांत रहिये, हम आपको भूमि देने वाले हैं। या तो हम भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित करेंगे या आपके द्वारा भूमि खरीदे जाने पर हम वित्त पोषण करेंगे। हम यह करेंगे या वह करेंगे और ये बातें करके उन्हें कब तक मूर्ख बनाते रहेंगे। आखिर आपको ऐसा करने के लिये कोई अन्य तरीका निकालना होगा। आपको इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए और यदि आप इसका समाधान नहीं करेंगे तो आपको पता है, इसके क्या परिणाम निकलेंगे, बहुत खराब परिणाम निकलेंगे। बाहर आग जल रही है, वह बहुत शीघ्र अंदर आ सकती है और अनुसूचित जाति के लोग झंडा उठाकर आ जाएंगे और आप तथा आपका संविधान नष्ट हो जाएगा। कुछ भी नहीं रहेगा।

अब, महोदय, मैं अपने माननीय मित्र को एक सुझाव देना चाहता हूँ और वह यह है। योजना आयोग के प्रतिवेदन से पता चलता है कि देश में बहुत बड़े ऐसे क्षेत्र का