35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 40

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प्रस्ताव अंगीकृत किया गया।

खंड-2 (निरर्हता का निवारण आदि)

संशोधन किया गया :

पृष्ठ 1 में, (1) पंक्ति 23 में ‘‘और’’ का लोप किया गया; और (2) पंक्ति 2 के बाद निम्नलिखित जोड़ा गया :-

‘‘(च) 8 अप्रैल, 1950 को भारत और पाकिस्तान के बीच किए गए करार के अनुसरण में असम सरकार या पश्चिमी बंगाल सरकार द्वारा किसी अवधि के लिए जिसका विस्तार 31 दिसंबर, 1950 से परे न हो, नियुक्त जांच आयोग के सदस्यों के पद; और (छ) किसी भी अवधि के लिए, जो अप्रैल 1951 के प्रथम दिन से परे न बढ़ाई जाए, बम्बई राजस्व अधिकरण के सदस्य का पद।’’

माननीय उपाध्यक्ष : हम अन्य संशोधनों पर विचार करेंगे।

श्री कॉमथ : चूंकि मंत्री महोदय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, इसलिए मैं 2 और 3 का प्रस्ताव नहीं करता, बल्कि न.ं 1 पर बाद में आएंगे।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : माननीय डॉ. अम्बेडकर के वक्तव्य को ध्यान में रखते

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हुए, मैं अपने संशोधन को आवश्यक नहीं समझता।

डॉ. अम्बेडकर : मैं माननीय मित्र द्वारा उठाए गए मुद्दे को, आपकी अनुज्ञा से, स्पष्ट करना चाहता हूँं। वास्तव में जब संबद्ध विशिष्ट विभाग ने संकल्प जारी करके खाद्यान अन्वेषण समिति बनाई, तो उल्लिखित भत्ता 20/- रुपए था और संभवतः इस स्थिति को स्पष्ट करने के प्रयोजनार्थ विधि मंत्रालय को जो सूचना दी गई थी वह यही संकल्प था। हमने उस संकल्प को ही कार्यरूप दिया है। किंतु अब मैंने सुना है कि खाद्य मंत्रालय ने वह नियम बदल दिया है और सदस्यों को कुछ और अधिक लेने के लिए अनुज्ञात कर दिया है। किंतु हमारी कार्यवाही का आधार उक्त संकल्प है।

श्री सिधवा : उस सदस्य का क्या होगा?

डॉ. अम्बेडकर : मेरे मित्र श्री सिधवा ने संभवतः इस मुद्दे को नहीं समझा है। जब तक राष्ट्रपति यह आदेश जारी नहीं करते कि सदस्य निरर्हित हो गया है, सदस्य सदन में बैठ सकता है और काम कर सकता है।

श्री सिधवा : मैं जानता हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : इसलिए, जैसा मैंने कहा, समितियों का गठन करते हुए मंत्रालयों द्वारा पारित अनेक संकल्प हमें दिए गए हैं और संकल्पों के आधार पर हमने यह