24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पाया है कि उन समितियों ने आधारभूत नियम का उल्लंघन नहीं किया यदि यह दर्शाते हुए और जानकारी दी जाती है कि ऐसे मामले हैं जहाँ सदस्यों ने वास्तव में अधिक धन लिया है, उस स्थिति को नियमित करना पूरी तरह संभव होगा। कठिनाई कहाँ है? मैं नहीं समझता।
श्री हिम्मत सिंगका : इसे व्यापक रूप में क्यों नहीं करते।
डॉ. अम्बेडकर : मैं इसे नहीं कर सकता। मुझे अवश्य ही इसके बारे में और जाँच करनी चाहिए कि वास्तव में स्थिति क्या है। यदि यह विधेयक पारित किया जाता है तो इससे कोई हानि होने नहीं जा रही है और एक अन्य विधेयक उन मामलों के विषय में लाया जाए, जिनका वास्तव में उसके अंतर्गत लाना आवश्यक है?
श्री सिधवा : वह कैसे हो सकता है?
डॉ. अम्बेडकर : क्यों? मैं नहीं समझता?
माननीय उपाध्यक्ष : इस पर निश्चित रूप से विचार किया जा सकता है। यदि इस पर कल तक विचार हो तो इससे कोई फर्क नहीं पडे़गा।
कुछ माननीय सदस्य : जी हाँ, श्रीमान्।
माननीय उपाध्यक्ष : किंतु, यदि कल से पहले ये मामले तय नहीं किए जा सकते तो हम विधेयक पर तत्काल विचार कर सकते हैं। राष्ट्रपति को सर्वप्रथम यह कहना चाहिए कि कोई सदस्य निरर्हित है। यह बात स्पष्ट है। अनुच्छेद 102 के खंड (1) (क) का कहना हैः ‘‘यदि वह भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन, ऐसे पद को छोड़कर, जिसको धारण करने वाले का निरर्हित न होना संसद ने विधि द्वारा घोषित किया है, कोई लाभ का पद धारण करता है।’’ अनुच्छेद 103 के अधीन प्रक्रिया से स्वतंत्र रूप में कोई प्रश्न उठाए बिना और मामला राष्ट्रपति को निर्देशित करते हुए, संसद यह कह सकती है कि ऐसा कोई पद लाभ का पद नहीं समझा जाएगा, जहाँ पर यह बात स्पष्ट है कि पारिश्रमिक वह है जो उचित प्रतिकर समझा जाए। एक अन्य विधेयक लाए बिना, यदि इसमें उपयुक्त संशोधन से इसे निपटाया जा सकता है, तो माननीय विधि मंत्री उस मामले पर विचार कर सकते हैं। इन सब समितियों की एक सूची है और श्री सिधवा का संशोधन स्थगित हो जाएगा। मैं सदन में दूसरा संशोधन रखूंगा, जिसका संभवतः विरोध नहीं होगा। वह श्री श्रीनारायण महथा के नाम में है।
डॉ. अम्बेडकर : उसे मैं स्वीकार कर रहा हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : इसे मैं सदन में रखूंगा। उसको छोड़कर अन्य बातों के लिए दिए गए श्री सिधवा के नोटिस पर अगले दिन विचार किया जा सकता है।