26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मन को शांत कर सकता है कि यदि कोई सदस्य दैनिक भत्ते से अधिक प्राप्त नहीं करता है, जिसके लिए संसद की बैठकों में उपस्थित होने के लिए संसद-सदस्य हकदार है तो उसे लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा। कोई संदेह उत्पन्न नहीं होगा और कोई विधेयक आवश्यक नहीं होगा।
डॉ. अम्बेडकर : जो कुछ मेरे माननीय मित्र ने कहा है मैं उसमें सुधार का केवल एक शब्द कहना चाहूँगा। जो कुछ वित्त मंत्रालय, मुझे वित्त मंत्रालय को बीच में नहीं लाना चाहिए-जो कुछ अब सरकार कहती है वह यह है। समिति के गैर-सदस्यों के लिए कतिपय भत्ते नियत किए गए हैं, जैसा मैंने कहा, हवाई यात्रा के लिए इतना, रेल से यात्रा करने के लिए इतने भत्ते कलकत्ता और बम्बई में 15/- रुपए और अन्य जगहों पर रहने के लिए बारह रुपये आठ आने (12-8-0)। रुपए ही वह एक मानदंड है जिसे सरकार भुगतान के मानदंड के रूप में स्वीकार करती है, जिसमें कोई लाभ का तत्व समाहित नहीं है। मेरा विश्वास है मेरे माननीय मित्र ने उसको ध्यान में नहीं रखा है। यदि हम अंशतः संसद के सदस्यों और अंशतः ऐसे सदस्यों, जो संसद-सदस्य नहीं हैं, वाली मिश्रित समिति को लें तो प्रत्यक्षतः हम भुगतान भिन्न मानदंड विहित नहीं कर सकते। भुगतान का मानदंड, इस प्रकार की मिश्रित समिति के लिए, जो हमें अंगीकार करना चाहिए वह मानदंड है जो उन सदस्यों के लिए अधिकथित किया गया है, जो संसद के सदस्य नहीं हैं और परिणामस्वरूप वह मानदंड निर्णायक मानदंड हो जाता है।
श्री सोंधी : श्रीमन्, मैं एक निवेदन करना चाहूँगा। कृषि विभाग की एक समिति केन्द्रीय सुपारी समिति है। दैनिक भत्ते 12-8-0 रुपए हैं न कि 12/- रुपए। क्या हम निरर्हित हैं। इसके चार सदस्य हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैंने डॉ. अम्बेडकर को बहुत ध्यान और सम्मान से
| kkxZo | Col2 |
|---|---|
| k | Z |
सुना है, किंतु मुझे विनम्रता के साथ उल्लेख करना होगा कि इस प्रश्न पर इस प्रकार विचार करना पूर्णतः गलत होगा। संविधान का अनुच्छेद 102 इसे बिल्कुल स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति अंतिम प्राधिकारी है, किसी विशिष्ट मामले को विनिश्चित करने की उन्हें अंतिम शक्ति है और इसके विकल्प के रूप में यह संसद है जो यह विनिश्चित कर सकती है कि कतिपय धारित पद निरर्हता की कोटि में नहीं आएंगे। वित्त मंत्रालय या सरकार जो भी हो, इस संबंध में कोई आत्यंतिक शक्ति नहीं है। वे कोई मानक नियत नहीं कर सकते। मान लीजिए, कोई समिति है, जिसकी सदस्यता में केवल 10/- रुपए या 5/- रुपए का भत्ता है किंतु फिर भी समिति ऐसे महत्व की हो सकती है कि इसकी सदस्यता एक सम्मान की बात मानी जाए और बहुत से लोग समिति में कार्य करना पसंद करें, ऐसे मामले में सरकार को ऐसी समिति